रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बार फिर रूस के भारी-भरकम 3000 किलोग्राम वजनी ग्लाइड बम की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, रूसी सेना ने यूक्रेन के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस शक्तिशाली हथियार का इस्तेमाल किया। इस हमले के बाद युद्ध की भयावहता और बढ़ गई है तथा सैन्य विशेषज्ञ इसे रूस के सबसे विनाशकारी पारंपरिक हथियारों में से एक मान रहे हैं।
ग्लाइड बम पारंपरिक बमों से अलग होते हैं। इनमें विशेष पंख (विंग किट) और गाइडेंस सिस्टम लगाए जाते हैं, जिससे इन्हें लड़ाकू विमान से काफी दूरी से छोड़ा जा सकता है। बम हवा में कई किलोमीटर तक ग्लाइड करते हुए तय लक्ष्य तक पहुंचता है। इससे हमलावर विमान को दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली के बेहद करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उसके सुरक्षित लौटने की संभावना बढ़ जाती है।
करीब 3 टन वजनी इस बम में भारी मात्रा में विस्फोटक भरा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका विस्फोट बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है। मजबूत इमारतें, बंकर, सैन्य कमांड सेंटर और कंक्रीट से बने ठिकाने भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। यदि इसे घनी आबादी वाले इलाके के पास इस्तेमाल किया जाए तो बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होने की आशंका रहती है।
रूसी सेना पिछले कुछ समय से ऐसे ग्लाइड बमों का अधिक उपयोग कर रही है। आधुनिक गाइडेंस किट की मदद से ये हथियार पहले की तुलना में अधिक सटीक निशाना साध सकते हैं। हालांकि, वास्तविक सटीकता मौसम, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और लक्ष्य की स्थिति जैसे कई कारकों पर भी निर्भर करती है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के भारी ग्लाइड बमों का उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाना ही नहीं, बल्कि विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना भी होता है। बड़े विस्फोट और व्यापक क्षति की आशंका के कारण ऐसे हथियार युद्ध के मैदान में रणनीतिक बढ़त दिलाने का प्रयास करते हैं।
दूसरी ओर, यूक्रेन लगातार अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने और ऐसे हमलों को रोकने की कोशिश कर रहा है। पश्चिमी देशों से मिले आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम रूस के हवाई हमलों का मुकाबला कर रहे हैं, लेकिन भारी ग्लाइड बमों का इस्तेमाल यूक्रेन के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने पहले ही हजारों लोगों की जान ली है और लाखों नागरिकों को विस्थापित किया है। ऐसे में अधिक शक्तिशाली हथियारों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध में लगातार अधिक विनाशकारी हथियारों का उपयोग बढ़ता है, तो इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह युद्ध किस दिशा में आगे बढ़ता है।








