अमेरिका और इजरायल के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों के बीच हाल ही में एक बयान ने नई चर्चा को जन्म दे दिया। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance की एक टिप्पणी, जिसमें उन्होंने अमेरिका को इजरायल का सबसे अहम सहयोगी बताया, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि अमेरिका निश्चित रूप से इजरायल का सबसे करीबी और महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन इजरायल के दुनिया के कई अन्य देशों के साथ भी मजबूत और भरोसेमंद संबंध हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर भारत का नाम लेते हुए कहा कि भारत जैसे देशों के साथ इजरायल की मित्रता लगातार मजबूत हुई है।
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक कूटनीति पर दुनिया की नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को केवल एक देश तक सीमित नहीं रखता, बल्कि अलग-अलग देशों के साथ रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया।
भारत और इजरायल के संबंध पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन, नवाचार और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में काफी मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय दौरे, संयुक्त परियोजनाएं और रणनीतिक साझेदारी इस रिश्ते को नई ऊंचाइयों तक ले गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू द्वारा भारत का नाम लेना इस बात का संकेत है कि इजरायल अपने वैश्विक साझेदारों के दायरे को व्यापक रूप से देखता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जेडी वेंस का बयान अमेरिका और इजरायल के पारंपरिक रिश्तों की मजबूती को दर्शाता है, लेकिन नेतन्याहू की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि इजरायल अन्य मित्र देशों के महत्व को भी समान रूप से स्वीकार करता है। उनके बयान को कई विशेषज्ञ संतुलित कूटनीतिक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। दोनों देश आधुनिक रक्षा तकनीक, खुफिया सहयोग, आतंकवाद-रोधी रणनीति और उन्नत सैन्य प्रणालियों के क्षेत्र में लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं। इसके अलावा कृषि और जल संरक्षण तकनीकों में भी दोनों देशों के बीच कई सफल परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के लिए बहुपक्षीय साझेदारी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में नेतन्याहू का भारत का उल्लेख यह संदेश देता है कि इजरायल अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ-साथ एशिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
हालांकि अमेरिका आज भी इजरायल का सबसे बड़ा रणनीतिक और सुरक्षा सहयोगी माना जाता है, लेकिन भारत, यूरोप और अन्य मित्र देशों के साथ बढ़ते संबंध इजरायल की व्यापक विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। यही कारण है कि नेतन्याहू के बयान को केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि इजरायल की व्यापक कूटनीतिक सोच के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।








