इंदौर। पद्म श्री डॉ. (श्रीमती) जनक पलटा मगिलिगन के मुख्य वक्तव्य के साथ रहेजा सोलर फूड प्रोसेसिंग (आरएसएफपी) में 34वें वार्षिक पर्यावरण संवाद सप्ताह 2026 के तीसरे दिन “सतत आजीविका के लिए जलवायु कार्रवाई” विषय पर एक प्रभावशाली विशेष सत्र का आयोजन किया गया।
सत्र की शुरुआत रहेजा सोलर फूड के निदेशक श्री वरुण रहेजा के स्वागत उद्बोधन से हुई। वरुण रहेजा ने डॉ. जनक पलटा मगिलिगन को अपना इंटर्नशिप गुरु बताते हुए कहा कि सौर ऊर्जा, सतत विकास और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में उन्हें डॉ. मगिलिगन से मिली प्रेरणा और मार्गदर्शन ही रहेजा सोलर फूड के विकास का आधार बना है।
मुख्य वक्ता पद्म श्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और विश्व पर्यावरण दिवस के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर जोर देते हुए कहा:
“पानी की कोई कमी नहीं है; जिस चीज़ की हमारे पास कमी है, वह है उचित जल प्रबंधन। उपलब्ध जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन से हम भविष्य की कई चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं।”
डॉ. मगिलिगन ने प्रतिभागियों को वृक्षारोपण, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और सौर ऊर्जा के उपयोग जैसे छोटे-छोटे व्यावहारिक कदमों को अपनाने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बड़े अभियानों से नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की जिम्मेदार आदतों से होती है।
वरिष्ठ समाज सेवी श्री वीरेंद्र गोयल ने प्लास्टिक प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सत्र में यह संदेश सर्वसम्मति से उभरा कि जलवायु कार्रवाई अब केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि यह हर व्यक्ति, परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। “पर्यावरण बचाओ, जीवन बचाओ” का नारा पूरे कार्यक्रम में गूंजता रहा।
वक्ताओं ने यह भी बताया कि सीमित संसाधनों और छोटी पहलों को नवाचार और सतत सोच के साथ जोड़कर बड़े उद्यमों का रूप दिया जा सकता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।
यह सत्र 34वें वार्षिक पर्यावरण संवाद सप्ताह 2026 का हिस्सा है, जो 30 मई से 5 जून 2026 तक चल रहा है। इस सप्ताह का उद्देश्य युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों को जलवायु कार्रवाई में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम का समापन संवादात्मक चर्चा और संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।








