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June 1, 2026 5:22 pm

बे-मौसम बारिश बनी खतरा! अप्रैल-मई में 6 बार हुई बारिश, शहर में बढ़े चिकनगुनिया के मामले

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अप्रैल और मई महीने में हुई लगातार बे-मौसम बारिश अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। मौसम में आए अचानक बदलाव और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति के कारण मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। इसका असर शहर में चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों के रूप में सामने आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों और अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

आमतौर पर अप्रैल और मई के महीने गर्म और शुष्क माने जाते हैं, लेकिन इस बार मौसम ने अलग ही रुख दिखाया। इन दो महीनों के दौरान शहर में छह बार बे-मौसम बारिश दर्ज की गई। कई क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण सड़कों, खाली प्लॉटों और निर्माण स्थलों पर पानी जमा हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि जमा हुआ पानी एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है, जिससे चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले कुछ सप्ताह से बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। जांच में कई मरीजों में चिकनगुनिया संक्रमण की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार इस बार संक्रमण अपेक्षाकृत तेजी से फैल रहा है क्योंकि मौसम में नमी अधिक बनी हुई है और मच्छरों की संख्या सामान्य से ज्यादा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में असहनीय दर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। कई मामलों में मरीजों को ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक जोड़ों के दर्द की समस्या बनी रह सकती है।

बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न इलाकों में विशेष सर्वे अभियान शुरू किया है। मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। नगर निगम की टीमें जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर सफाई अभियान चला रही हैं ताकि मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।

अधिकारियों ने लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। घरों के आसपास पानी जमा न होने देने, कूलर और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करने तथा पूरी बाजू के कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। इसके अलावा मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में चिकनगुनिया के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। मानसून से पहले ही मच्छरों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य तंत्र के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में प्रशासन और आम नागरिकों दोनों को मिलकर बीमारी की रोकथाम के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अस्पतालों को आवश्यक दवाएं और संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच और इलाज कराने से बीमारी के गंभीर प्रभावों से बचा जा सकता है।

बे-मौसम बारिश ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं इसके बाद बढ़े चिकनगुनिया के मामलों ने यह भी दिखा दिया कि बदलता मौसम किस तरह नई स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर सकता है। इसलिए सतर्कता और स्वच्छता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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