मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच दिल्ली-एनसीआर में CNG के दाम एक बार फिर बढ़ा दिए गए हैं। ताजा संशोधन के बाद राजधानी में CNG की कीमत ₹2 प्रति किलोग्राम बढ़कर ₹83.09 प्रति किलो पहुंच गई है।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ दिनों से लगातार ईंधन कीमतों में बदलाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पिछले करीब 11 से 15 दिनों के भीतर CNG में चौथी बार की गई बढ़ोतरी है, जिससे ऑटो, टैक्सी और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहन चालकों पर सीधा आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
लगातार बढ़ती कीमतों से उपभोक्ता परेशान
नई कीमतें लागू होने के बाद दिल्ली में CNG अब ₹83.09 प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ निजी वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में चलने वाले लाखों ऑटो, कैब और डिलीवरी वाहनों पर भी पड़ रहा है। लगातार बढ़ती लागत के कारण परिवहन सेवाओं के महंगे होने की आशंका भी बढ़ गई है।
पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है, जिससे ईंधन महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन में बाधा इसका प्रमुख कारण है।
मिडिल ईस्ट तनाव क्यों बढ़ा रहा असर?
जानकारों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। तेल और गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊपर जा रही हैं। भारत जैसे देशों में, जो बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करते हैं, इसका सीधा असर खुदरा ईंधन कीमतों पर दिखाई देता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
11 दिन में चौथी बढ़ोतरी से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमतों में यह हालिया बढ़ोतरी पिछले 11 दिनों में चौथी बार हुई है। लगातार हो रहे बदलावों से आम उपभोक्ताओं और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ऑटो और टैक्सी यूनियनों का कहना है कि बढ़ती लागत के चलते उन्हें किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, उपभोक्ताओं के लिए राहत के कोई बड़े संकेत नजर नहीं आ रहे हैं, और ईंधन महंगाई का दबाव बरकरार रहने की संभावना है।








