अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर मध्य पूर्व की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अगर अरब और मुस्लिम देश इसराइल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इससे सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति बदल सकती है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में शुरू हुए “अब्राहम समझौते” ने क्षेत्र में शांति और सहयोग की नई संभावनाएं पैदा की थीं और आने वाले समय में और देश इस पहल से जुड़ सकते हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि लंबे समय तक मध्य पूर्व संघर्ष, अविश्वास और युद्ध का केंद्र बना रहा, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उनके मुताबिक, कई अरब देश समझ चुके हैं कि आर्थिक विकास, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इसराइल के साथ संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा सहयोग बढ़ता है, तो टकराव की संभावना कम होती है।
पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनके प्रशासन के दौरान संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे देशों ने इसराइल के साथ रिश्तों को सामान्य बनाया था। ट्रंप ने इसे अपनी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सिर्फ कूटनीतिक समझौता नहीं था, बल्कि मध्य पूर्व में नई राजनीतिक सोच की शुरुआत थी।
ट्रंप के अनुसार, अगर आने वाले समय में सऊदी अरब समेत अन्य मुस्लिम देश भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो इससे वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग के नए गठबंधन उभर सकते हैं, जिससे चीन, रूस और ईरान जैसी शक्तियों के प्रभाव को भी चुनौती मिलेगी।
हालांकि ट्रंप के इस बयान पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि अरब देशों और इसराइल के बीच संबंध बेहतर होने से क्षेत्र में आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ कई मुस्लिम संगठनों और फिलिस्तीनी समर्थक समूहों ने इस तरह के समझौतों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान निकाले बिना इसराइल के साथ रिश्तों का सामान्य होना क्षेत्रीय असंतोष को बढ़ा सकता है।
मध्य पूर्व के विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में क्षेत्र की राजनीति तेजी से बदली है। ईरान के बढ़ते प्रभाव, सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक हितों ने कई अरब देशों को नई रणनीति अपनाने के लिए मजबूर किया है। इसी वजह से कुछ देश अब इसराइल के साथ प्रत्यक्ष टकराव के बजाय सहयोग की नीति की ओर बढ़ रहे हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि यदि वह दोबारा सत्ता में आते हैं, तो वह अब्राहम समझौतों को और आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य मध्य पूर्व में “स्थायी शांति और मजबूत आर्थिक साझेदारी” स्थापित करना होगा।
फिलहाल ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब गाजा युद्ध, ईरान-इसराइल तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा संकटों के कारण मध्य पूर्व फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। ऐसे में अरब देशों और इसराइल के रिश्तों को लेकर ट्रंप की टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।








