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April 12, 2026 1:57 pm

इस्लामाबाद में वार्ता को लेकर थरूर का बयान, पाकिस्तान की कूटनीति पर टिप्पणी

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अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित बातचीत को लेकर तंज कसते हुए पाकिस्तान की कूटनीतिक मंशा पर सवाल उठाए हैं।

थरूर ने कहा कि “ऐसा रोल तो पाकिस्तान ही निभा सकता है,” जो उनके अनुसार एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी थी। उनके इस बयान को पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि और उसकी मध्यस्थता की विश्वसनीयता पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान का अतीत और उसकी नीतियां उसे एक निष्पक्ष मंच के रूप में स्थापित करने में चुनौती पैदा करती हैं।

दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हुई है कि Pakistan, अमेरिका और Iran के बीच बैकडोर डिप्लोमेसी के लिए एक संभावित मंच बन सकता है। इस्लामाबाद में ऐसी वार्ता की संभावना को लेकर क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस पहल के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने और एक जिम्मेदार मध्यस्थ के रूप में खुद को पेश करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, यह कदम अमेरिका के साथ रिश्तों को संतुलित करने और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास भी हो सकता है।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान का पिछला रिकॉर्ड—खासतौर पर आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता के आरोप—उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में अगर वह अमेरिका-ईरान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मध्यस्थता करता है, तो इसे लेकर संदेह स्वाभाविक है।

थरूर का बयान इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि इस तरह की कूटनीतिक पहल में भरोसे और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, किसी भी मध्यस्थ देश के लिए यह जरूरी है कि दोनों पक्ष उसे समान रूप से विश्वसनीय मानें।

वहीं, इस मुद्दे पर अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन वहां की कूटनीतिक गतिविधियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि वह इस अवसर को गंभीरता से ले रहा है।

कुल मिलाकर, इस्लामाबाद में संभावित वार्ता और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह दिखाती हैं कि वैश्विक कूटनीति में हर कदम के पीछे कई परतें होती हैं। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि पाकिस्तान की यह पहल वास्तव में शांति की दिशा में कदम साबित होती है या केवल एक रणनीतिक कोशिश बनकर रह जाती है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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