हे मनुष्य की संतानो !
क्या तुम यह नहीं जानते कि हमने तुम सबको एक ही मिट्टी से क्यों पैदा किया ? इसलिये कि कोई प्राणी अपने को दूसरे से श्रेष्ठ न समझे। सदैव स्मरण रखो और अपने हृदय को टटोलो कि तुम्हारी उत्पत्ति कैसे हुई थी ? चूंकि हमने एक ही तत्व से तुम्हारी उत्पत्ति की है, तुम्हारा यह परम कर्तव्य है कि तुम एक आत्मा के समान रहो, एक साथ चलो, एक ही समान भोजन करो और एक धरा पर रहो, ताकि तुम्हारे अन्तर्तम जीवन से, तुम्हारे कर्मों और यत्नों से एकता के चिह्नों और त्याग की सुगंध का साक्षात्कार हो सके। यही मेरा परामर्श है तुम्हारे लिए, ओ तेजोमयता के अनुचरों ! इस उपदेश का पालन करो ताकि अनुपम महिमा के वृक्ष से तुम्हे पावनता के फल प्राप्त हो सकें।
बहाउल्लाह~







