यह एक वायरल मैसेज या अफवाह की तरह लग रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि घर में रखी एंटी-एलर्जी गोली (जैसे Cetirizine, Levocetirizine, Loratadine आदि) जानलेवा बन रही है, और डॉ. इवान लेविन (Dr. Ivan Levin) नाम के किसी डॉक्टर की “वायरल चेतावनी” का जिक्र है।
मैंने इस बारे में उपलब्ध जानकारी और हालिया खोजों से पता लगाया है कि ऐसी कोई विश्वसनीय या वायरल चेतावनी डॉ. इवान लेविन के नाम से नहीं मिली। न तो कोई प्रसिद्ध एलर्जी विशेषज्ञ या डॉक्टर इस नाम से जुड़ा ऐसा दावा कर रहा है, और न ही कोई मुख्यधारा की मेडिकल न्यूज़, WHO, FDA या भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय में इस तरह की कोई अलर्ट जारी हुई है कि सामान्य एंटी-एलर्जी टैबलेट अचानक जानलेवा हो गई हैं।
यह संभवतः फेक न्यूज़, व्हाट्सएप फॉरवर्ड या क्लिकबेट टाइप का मैसेज है, जो अक्सर दवाओं को लेकर डर फैलाने के लिए वायरल होता है। ऐसे मैसेज में आमतौर पर किसी “डॉक्टर” का नाम जोड़कर विश्वसनीयता दिखाने की कोशिश की जाती है।
असल में क्या हो सकता है?
- कुछ एंटी-एलर्जी दवाओं (खासकर पुरानी पीढ़ी की जैसे Chlorpheniramine या कुछ कॉम्बिनेशन वाली) के लंबे समय तक और बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे:
- नींद आना, मुंह सूखना
- दिल की धड़कन बढ़ना (rare cases में arrhythmia)
- लिवर/किडनी पर असर (अगर ओवरडोज या अन्य दवाओं के साथ)
- हाल ही में भारत सरकार ने कुछ फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं पर बैन लगाया है, जिनमें एंटी-एलर्जी + अन्य दवाएं मिली होती हैं (जैसे कुछ कफ सिरप या पेनकिलर + एंटी-एलर्जी), क्योंकि वे अनावश्यक और जोखिम भरी पाई गईं। लेकिन सामान्य सिंगल एंटी-हिस्टामाइन गोली (जैसे Cetirizine) सुरक्षित मानी जाती हैं जब डॉक्टर की सलाह से ली जाएं।
- हाल के कुछ न्यूज़ में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एंटी-एलर्जी दवाओं के लंबे समय के इस्तेमाल से हृदय संबंधी जोखिम की चेतावनी दी गई है, लेकिन यह “जानलेवा बन रही है” जैसा डरावना नहीं है — बल्कि सावधानी बरतने की बात है।
सलाह:
- घर में रखी कोई भी दवा एक्सपायरी डेट चेक करें — एक्सपायर दवा खतरनाक हो सकती है।
- एंटी-एलर्जी गोली नियमित या लंबे समय तक ले रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लें, खुद न लें।
- वायरल मैसेज पर भरोसा न करें — हमेशा AIIMS, ICMR, या विश्वसनीय न्यूज़ सोर्स (जैसे Amar Ujala, NDTV Health) से वेरिफाई करें।
- अगर कोई असली चेतावनी होती तो बड़े-बड़े अस्पताल/सरकार अलर्ट जारी करते।






