हे धूल के पुत्र !
अपनी आँखें मूंद ले ताकि तू मेरे रूप को देख सके, अपने कानों को बंद कर ले, ताकि तू मेरे स्वर की सुमधुर रागिनी का रसास्वादन कर सके। समस्त ज्ञान से स्वयं को रिक्त कर ले, ताकि तू मुझ महान का ज्ञान प्राप्त कर सके और स्वयं को धन-वैभव से बिल्कुल निर्मल कर ले, ताकि मेरी अनन्त सम्पदा के महासागर से तू अपना स्थायी भाग प्राप्त कर सके। मेरे सौन्दर्य के अतिरिक्त अन्य सब ओर से अपनी आँखें मूंद ले, मेरे शब्दों के अतिरिक्त अन्य कुछ भी न सुन, मेरे ज्ञान के अतिरिक्त अन्य सभी ज्ञान से स्वयं को रिक्त कर ले, ताकि तू स्पष्ट दृष्टि, एक निर्मल हृदय के साथ और एकाग्रचित होकर मेरी पावनता के दरबार में प्रवेश कर सके।
बहाउल्लाह~
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