नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्विगी, जोमैटो, ओला और उबर जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कर्मचारी का दर्जा देने की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के अधिकार सुनिश्चित करना है।
पिछले कई सालों से फूड डिलीवरी और कैब ड्राइवरों की नौकरी को अस्थायी श्रमिक के रूप में देखा जाता रहा है। इस वजह से उन्हें पेंशन, मेडिकल सुविधाएं, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल पाते थे। सरकार ने कहा है कि अब इस निर्णय के बाद प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कर्मचारी कानून के तहत सभी सुरक्षा लाभ मिलेंगे।
सरकार के अनुसार, यह कदम डिजिटल और गिग इकॉनमी (Gig Economy) को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। कर्मचारी दर्जा मिलने के बाद, वर्कर्स को मिनिमम वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा, बीमा, और रोजगार संबंधी अन्य कानूनी अधिकार मिलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय फूड डिलीवरी और कैब सेवा प्रदाताओं के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकता है। इससे न केवल वर्कर्स की आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि उन्हें अपने काम के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्याओं का कानूनी समाधान भी मिलेगा।
स्विगी और जोमैटो के वर्कर्स ने इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि यह निर्णय उनके जीवन में स्थिरता और आत्मनिर्भरता लाएगा। वहीं, ओला और उबर ड्राइवरों ने भी इसे सकारात्मक बदलाव करार दिया है।
सरकार का यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सुरक्षित और समान कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।






