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February 21, 2026 3:31 pm

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल SIR मामले में तीखी बहस: CJI सूर्यकांत ने कपिल सिब्बल को टोका, ‘ट्रस्ट डेफिसिट’ पर न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश

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नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान तीखी बहस देखने को मिली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच (जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली के साथ) ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग (ECI) के बीच “ट्रस्ट डेफिसिट” (भरोसे की कमी) पर गहरी नाराजगी जताई और असाधारण कदम उठाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वे मौजूदा और पूर्व जिला न्यायाधीशों/एडीजे रैंक के न्यायिक अधिकारियों को SIR प्रक्रिया में दावों और आपत्तियों के फैसले के लिए तैनात करें।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से) ने दलील दी कि कोर्ट ने 9 फरवरी के आदेश (पैरा-6) में दस्तावेज अपलोड करने की समय-सीमा 21 फरवरी तक बढ़ाई थी, लेकिन 15 फरवरी से ही अपलोडिंग रोक दी गई है। उन्होंने कहा, “यही हो रहा है।” CJI सूर्यकांत ने तुरंत टोकते हुए पूछा, “आप किस आदेश का जिक्र कर रहे हैं?” सिब्बल ने 9 फरवरी के आदेश का हवाला दिया, लेकिन CJI ने सख्ती से कहा कि “स्टेप बाय स्टेप अनुपालन दिखाया जाए”। उन्होंने ग्रुप ‘बी’ अधिकारियों के बजाय ग्रुप ‘ए’ (SDM रैंक) अधिकारियों की उपलब्धता पर सवाल उठाया और पूछा कि क्या चुनाव आयोग को योग्य ईआरओ (Electoral Registration Officers) मिले हैं?

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने बताया कि आयोग ने योग्य अधिकारियों की मांग की थी और पत्राचार भी हुआ है। उन्होंने कहा कि उपयुक्त ईआरओ की तलाश जारी है और संबंधित दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे गए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार और ECI के बीच आरोप-प्रत्यारोपों को “दुर्भाग्यपूर्ण ब्लेम गेम” बताते हुए कहा कि यह स्थिति “असाधारण” है, इसलिए अनुच्छेद 142 के तहत न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी हो गया।

प्रमुख आदेश और निर्देश:

  • कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मौजूदा और पूर्व न्यायिक अधिकारियों (जिला न्यायाधीश/एडीजे स्तर) की तैनाती का अनुरोध, ताकि लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट में दावों/आपत्तियों का निष्पक्ष फैसला हो सके।
  • प्रत्येक जिले में ये अधिकारी ECI और राज्य सरकार के अधिकारियों की मदद से काम करेंगे।
  • 21 फरवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट में बैठक आयोजित करने का निर्देश – जिसमें चीफ जस्टिस, चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर, चीफ सेक्रेटरी, DGP, एडवोकेट जनरल और एएसजी शामिल होंगे।
  • ECI को 28 फरवरी तक प्रोसेस्ड मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति, बाकी दावों पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी की जा सकती है।
  • पश्चिम बंगाल DGP को हिंसा की शिकायतों पर हलफनामा दाखिल करने का आदेश।

कोर्ट ने कहा कि अगर SIR प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो राज्य सरकार को परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 नजदीक हैं और मतदाता सूची में लाखों नामों पर विवाद है। TMC ने इसे ECI के खिलाफ “नो-ट्रस्ट वोट” बताया है, जबकि ECI का कहना है कि प्रक्रिया निष्पक्षता से चल रही है।

अगली सुनवाई मार्च के पहले हफ्ते में होगी। यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमाया हुआ है, क्योंकि SIR में कई नाम हटाए गए हैं और दावों की संख्या लाखों में है।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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