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September 6, 2026 12:47 pm

ISRO के निजीकरण पर 9 कर्मचारी यूनियनों का सवाल! पूछा- क्या अब सिर्फ रिसर्च तक सीमित रह जाएगा इसरो?

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को लेकर कर्मचारियों की चिंता सामने आई है। इसरो के अलग-अलग केंद्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 9 कर्मचारी संगठनों ने ISRO चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी. नारायणन को संयुक्त पत्र भेजकर सरकार की नीति और संगठन की भविष्य की भूमिका पर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के खिलाफ नहीं हैं। उनकी मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ने के साथ कहीं ISRO के पारंपरिक निर्माण और संचालन संबंधी काम धीरे-धीरे बाहर न चले जाएं और संगठन केवल रिसर्च एवं डेवलपमेंट तक सीमित न रह जाए।

9 कर्मचारी संगठनों ने क्यों लिखी चिट्ठी?

4 सितंबर को भेजे गए संयुक्त प्रतिनिधित्व में कर्मचारी संगठनों ने ISRO की भविष्य की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा कि आने वाले समय में PSLV, LVM-3 और SSLV जैसे लॉन्च व्हीकल के डिजाइन, विकास, निर्माण, एकीकरण, परीक्षण और लॉन्चिंग में ISRO की भूमिका क्या होगी।

कर्मचारियों ने IN-SPACe के चेयरमैन पवन गोयनका के उस कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें भविष्य में ISRO द्वारा लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करने की बात कही गई थी। कर्मचारी संगठनों ने पूछा कि क्या यह भारत सरकार, अंतरिक्ष आयोग या अंतरिक्ष विभाग का आधिकारिक और स्वीकृत फैसला है। अगर ऐसा कोई निर्णय लिया गया है तो उन्होंने उसकी नीति, तारीख और आधिकारिक आधार की जानकारी मांगी है।

‘रिसर्च तक सीमित होने’ की आशंका

कर्मचारी संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि ISRO धीरे-धीरे लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट के निर्माण तथा अन्य ऑपरेशनल गतिविधियों से पीछे हटता है, तो उसकी आंतरिक तकनीकी क्षमता और संस्थागत अनुभव पर असर पड़ सकता है।

उनका तर्क है कि लॉन्च व्हीकल का डिजाइन, इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और लॉन्च ऑपरेशन सिर्फ सामान्य मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां नहीं हैं, बल्कि ISRO की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक विशेषज्ञता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी सवाल

संयुक्त पत्र में कर्मचारियों ने अपनी नौकरियों, नई भर्तियों और प्रमोशन से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर अधिक से अधिक काम निजी संस्थाओं को स्थानांतरित होता है तो ISRO में स्वीकृत पदों की संख्या घटने, नई भर्ती सीमित होने और कर्मचारियों के लिए कौशल विकास एवं पदोन्नति के अवसर कम होने की आशंका है।

कर्मचारी संगठनों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक धन से विकसित तकनीक, टेस्ट सुविधाओं, लॉन्च कॉम्प्लेक्स और तकनीकी ज्ञान को निजी क्षेत्र के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए।

निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाने की नीति

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को विस्तार देना, निजी निवेश को बढ़ावा देना और भारत की वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में हिस्सेदारी बढ़ाना है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी और मजबूत सार्वजनिक ISRO एक साथ मौजूद हो सकते हैं, लेकिन संगठन की मूल जिम्मेदारियों में बड़े बदलाव किए जाने से पहले कर्मचारियों को स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।

NSIL और IN-SPACe की भूमिका पर भी सवाल

कर्मचारी संगठनों ने यह भी पूछा है कि सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित तकनीक और सुविधाओं को निजी संस्थाओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया में NSIL और IN-SPACe की भूमिका क्या होगी। उन्होंने इस संबंध में संस्थागत व्यवस्था और नीति की स्पष्ट जानकारी मांगी है।

उनका कहना है कि तकनीक और बुनियादी ढांचे के हस्तांतरण से जुड़े फैसलों में राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, रोजगार और तकनीकी क्षमता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।

ISRO के भविष्य पर अब नजर

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और निजी कंपनियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों की चिट्ठी ने ISRO की भविष्य की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ISRO को केवल रिसर्च तक सीमित करने का कोई अंतिम सरकारी फैसला हो चुका है। कर्मचारी संगठनों ने मुख्य रूप से इसी मुद्दे पर आधिकारिक और लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंतरिक्ष विभाग और ISRO नेतृत्व इन सवालों पर क्या जवाब देता है और भविष्य में सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी तथा निजी क्षेत्र के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किस तरह तय किया जाता है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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