दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब मामले में पुलिस की ओर से 72 घंटे के भीतर गिरफ्तारी का भरोसा दिए जाने के बाद कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही थी।
बुलंदशहर से पकड़ा गया स्वतंत्र भारद्वाज
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस को स्वतंत्र भारद्वाज के बुलंदशहर में होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और उसे हिरासत में लिया। इससे पहले उसके वहां से निकलने की खबरें भी सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।
मामला जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है। इस घटना को लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज किया गया था। स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य व्यक्ति का नाम मामले में सामने आया था।
72 घंटे में कार्रवाई का दिया गया था भरोसा
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन से जुड़े लोग पुलिस अधिकारियों से मिले थे। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत के दौरान पुलिस ने 72 घंटे के भीतर आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई का भरोसा दिया था। इसके बाद अगले ही दिन बुलंदशहर में पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को पकड़ लिया।
इस घटनाक्रम के बाद मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी। प्रदर्शन से जुड़े लोगों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
मामले ने उस वक्त ज्यादा तूल पकड़ा, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस वीडियो में उसने जंतर-मंतर की घटना और निशु आजाद के पिता के साथ हुई कथित मारपीट का जिक्र किया था। वीडियो सामने आने के बाद उसकी गिरफ्तारी की मांग और तेज हो गई।
हालांकि, बाद में स्वतंत्र भारद्वाज की ओर से घटना को लेकर आत्मरक्षा का दावा किए जाने की भी खबरें सामने आईं। ऐसे में घटना के वास्तविक तथ्यों और आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगी।
SC/ST एक्ट और POCSO से जुड़े मामले भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा एक नाबालिग की शिकायत से जुड़े अलग मामले में POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट है। इन मामलों में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत के अंतिम फैसले से पहले दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
अब कोर्ट में पेशी और पुलिस कस्टडी
गिरफ्तारी के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को अदालत के सामने पेश किया गया। 5 सितंबर को कोर्ट ने उसे एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। अब पुलिस इस दौरान मामले से जुड़े तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर सकती है।
फिलहाल 72 घंटे के भीतर कार्रवाई के आश्वासन के बाद हुई गिरफ्तारी ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में लगाए गए आरोपों पर कानूनी रूप से क्या निष्कर्ष निकलता है।








