राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़ा संपत्ति का मामला इन दिनों चर्चा में है। दंपति और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा करीब ढाई साल के दौरान दो लग्जरी रिसॉर्ट में 40 विला और कॉटेज खरीदने का मामला सामने आया है। इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि संपत्तियां खरीदने के बाद इन्हें उसी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया, जिससे हर साल करीब 1.80 करोड़ रुपये किराये के रूप में मिलने का दावा है। इस पूरे मामले की जांच अब राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) कर रहा है।
उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में खरीदी गईं 40 संपत्तियां
ACB की प्रारंभिक जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने सितंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 40 संपत्तियां खरीदीं। इनमें उदयपुर के रिसॉर्ट में 20 कॉटेज और अलवर के रिसॉर्ट में 20 विला शामिल हैं। ये संपत्तियां गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गई थीं, जो अनंता ब्रांड के तहत रिसॉर्ट संचालित करती है।
बताया जा रहा है कि इन संपत्तियों को IAS अधिकारी, उनकी पत्नी, दोनों बेटों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर खरीदा गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ संपत्तियां बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर खरीदी गईं। इसी वजह से इन सौदों और इनके लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की पड़ताल की जा रही है।
हर साल 1.80 करोड़ रुपये किराये से कमाई का दावा
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू संपत्तियों की खरीद के बाद उन्हें वापस उसी कंपनी को लीज पर देना है। रिपोर्ट के मुताबिक, उदयपुर स्थित प्रत्येक कॉटेज के लिए सालाना करीब 4 लाख रुपये और अलवर स्थित प्रत्येक विला के लिए 5 लाख रुपये किराया तय किया गया था। इस हिसाब से 40 संपत्तियों से हर साल करीब 1.80 करोड़ रुपये की आय होने का प्रावधान बताया गया है। इसमें उदयपुर की संपत्तियों से करीब 80 लाख रुपये और अलवर की संपत्तियों से लगभग 1 करोड़ रुपये सालाना मिलने की बात सामने आई है।
ACB इस बात की जांच कर रही है कि खरीद और लीज का यह पूरा समझौता किन परिस्थितियों में हुआ और क्या इसके पीछे किसी तरह का अनुचित लाभ पहुंचाने का मामला था।
निजी कंपनी को सरकारी लाभ पहुंचाने का आरोप
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की 30 अक्टूबर को जारी जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच जरूरी मानी गई है। आरोप है कि अग्रवाल ने अपने अलग-अलग सरकारी पदों पर रहते हुए कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में छूट दिलाने, जरूरी प्रमाणपत्रों की उचित जांच के बिना मंजूरियां दिलाने और विशेष रियायती वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
ACB का कहना है कि इन कथित फैसलों से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हो सकता है। राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मामले में विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी है। अब एजेंसी अधिकारी, कंपनी के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
एक ही दिन में विला की रजिस्ट्री और वित्तीय पैकेज पर भी सवाल
जांच में सामने आए एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू के मुताबिक, 27 मार्च 2026 को गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जारी किया गया था। इसी तारीख को अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला की रजिस्ट्री भी कराई गई थी। दोनों घटनाओं की तारीख एक होने के कारण ACB इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है।
दोनों अधिकारियों को APO किया गया
मामला सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को 28 अक्टूबर को अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (APO) पर रखा था। इसके बाद 31 अक्टूबर को उनकी पत्नी और वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर को भी APO कर दिया गया। प्रशाखा माथुर राजस्थान पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर कार्यरत थीं।
फिलहाल इस मामले में आरोपों की जांच जारी है। ACB आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की आशंका, संपत्तियों की खरीद के लिए धन के स्रोत और निजी कंपनी को कथित तौर पर दिए गए सरकारी लाभों की पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन संपत्ति सौदों और सरकारी फैसलों के बीच क्या संबंध था। अभी तक सामने आए आरोप जांच का विषय हैं और इन्हें किसी अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।








