सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीएमआरएल-एक्सारोजिक (CMRL-Exalogic) पेऑफ मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी और दामाद सहित अन्य लोगों के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी। साथ ही, अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि वह अपने वैधानिक दायरे में रहे और अन्य एजेंसियों के अधिकारों में दखल न दे।
शीर्ष अदालत ने सात दिनों के लिए आगे की जांच पर रोक लगा दी है, जिससे याचिकाकर्ताओं को केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपनी अपील आगे बढ़ाने का मौका मिल गया है।
दशहरा की छुट्टियों के दौरान हुई एक विशेष सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने विजयन और अन्य को सिंगल बेंच के 9 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति दे दी।
जब ईडी ने उच्च न्यायालय के आदेश का बचाव किया, तो जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आपने (ईडी) अपना वैधानिक कर्तव्य निभा लिया है। राज्य को अपना वैधानिक कर्तव्य निभाना है। आपके पास एक अनुसूचित अपराध (scheduled offence) है; आप शिकायत दर्ज करें और अपनी अभियोजन कार्रवाई आगे बढ़ाएं। अपनी वैधानिक सीमाओं से आगे हाथ न बढ़ाएं। हम इसे बहुत स्पष्ट कर रहे हैं। अन्य जांच एजेंसियों की वैधानिक शक्तियों में दखल देने के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल न करें।”
शीर्ष अदालत ने आपराधिक मामला दर्ज करने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ताओं को अपनी अपील आगे बढ़ाने की अनुमति देते हुए, सात दिनों के लिए आगे की जांच पर रोक लगा दी है।








