भारतीय रेलवे की आधुनिक और सेमी-हाईस्पीड ट्रेन सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ तेज और आरामदायक सफर की पहचान नहीं रह गई है, बल्कि रेलवे के लिए मजबूत यात्री मांग और राजस्व का भी अहम जरिया बनती दिख रही है। मार्च 2026 में रेलवे के नेटवर्क पर 162 वंदे भारत चेयर कार सेवाएं संचालित थीं और जुलाई 2026 में सरकार ने भी 162 वंदे भारत सेवाओं के संचालन की पुष्टि की। इसके अलावा दो वंदे भारत स्लीपर सेवाएं भी चल रही थीं।
करीब 4 करोड़ यात्रियों ने किया सफर
रेलवे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 4 करोड़ यात्रियों ने वंदे भारत सेवाओं से सफर किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 34 फीसदी अधिक था। शुरुआत से अब तक वंदे भारत में 9.1 करोड़ से ज्यादा यात्रियों के सफर और करीब एक लाख ट्रिप का आंकड़ा सामने आया है। कई रूटों पर इसकी ऑक्यूपेंसी 100 फीसदी से ऊपर रही है।
यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या बताती है कि वंदे भारत को लेकर मांग मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि रेलवे कई व्यस्त रूटों पर कोचों की संख्या बढ़ाकर ज्यादा यात्रियों को सीट उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है।
162 ट्रेनों का बड़ा नेटवर्क
वंदे भारत की शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-वाराणसी रूट से हुई थी। इसके बाद यह सेवा देश के अलग-अलग हिस्सों तक तेजी से पहुंची। जुलाई 2026 तक सरकार के अनुसार 162 वंदे भारत चेयर कार सेवाएं देशभर में संचालित हो रही थीं। इन ट्रेनों में आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, CCTV, KAVACH और तेज गति जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
रेलवे ने कुछ रूटों पर 20 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की संख्या भी बढ़ाई है। अप्रैल 2026 में रेलवे ने बताया था कि 162 सेवाओं में 38 सेवाएं 20 कोच, 34 सेवाएं 16 कोच और 90 सेवाएं 8 कोच के साथ चल रही थीं।
गुजरात में सामने आया कमाई का आंकड़ा
वंदे भारत की कमाई का एक उदाहरण गुजरात में भी देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2022 से मार्च 2026 के बीच गुजरात से संचालित छह जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों में करीब 73 लाख यात्रियों ने सफर किया और लगभग 722 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया गया।
हालांकि, पूरे देश की सभी वंदे भारत सेवाओं को जोड़कर इसे सीधे रेलवे के कुल मुनाफे के बराबर मानना सही नहीं होगा। ट्रेन की कमाई और रेलवे के शुद्ध लाभ में परिचालन, रखरखाव, स्टाफ, ऊर्जा और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। इसलिए ‘कैश काउ’ शब्द यहां इसकी मजबूत मांग और कमाई की क्षमता को दर्शाने के तौर पर समझना बेहतर है।
लगभग 100 फीसदी ऑक्यूपेंसी, बढ़ रही मांग
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार वंदे भारत ट्रेनों में यात्री ऑक्यूपेंसी करीब 100 फीसदी के आसपास पहुंच रही है। सरकार का कहना है कि इन ट्रेनों के किराए को भी कई अंतरराष्ट्रीय समान सेवाओं की तुलना में किफायती रखा गया है।
तेज यात्रा, बेहतर समयपालन, आधुनिक कोच और आरामदायक सीटिंग के कारण वंदे भारत की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। यही बढ़ती मांग रेलवे को ज्यादा कोच और नए रूट जोड़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
स्लीपर वंदे भारत से बढ़ी उम्मीद
जनवरी 2026 में वंदे भारत स्लीपर सेवा की शुरुआत हुई। सरकार के अनुसार, शुरुआती तीन महीनों में पहली स्लीपर वंदे भारत ने 119 यात्राओं में करीब 1.21 लाख यात्रियों को सफर कराया और 100 फीसदी ऑक्यूपेंसी दर्ज की। इससे संकेत मिलता है कि लंबी दूरी के प्रीमियम रेल सफर के बाजार में भी वंदे भारत के लिए मजबूत मांग मौजूद है।
कुल मिलाकर, वंदे भारत भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की सबसे प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। 162 सेवाओं का बड़ा नेटवर्क, लगातार बढ़ती यात्री संख्या और कई रूटों पर लगभग पूरी क्षमता के साथ संचालन इसे रेलवे के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बनाता है। हालांकि इसे सीधे ‘रेलवे की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली ट्रेन’ कहना उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से साबित नहीं होता, लेकिन मजबूत मांग और उच्च ऑक्यूपेंसी के चलते वंदे भारत रेलवे की कमाई के लिहाज से बेहद अहम सेवा जरूर बन गई है।








