बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वाल्टरगंज थाने के तत्कालीन प्रभारी सूर्य प्रकाश सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला, उसके पिता और एक वकील को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, अधिकारी से कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी।
महिला, पिता और वकील गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और अधिवक्ता विजय प्रकाश के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि तीनों एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जो लोगों को कथित तौर पर निजी संबंधों और बातचीत के जरिए अपने जाल में फंसाकर बाद में ब्लैकमेल करता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो वाहन और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मामले में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
थानेदार से कैसे हुई मुलाकात?
पुलिस जांच के मुताबिक, महिला की मुलाकात सूर्य प्रकाश सिंह से एक मामले के सिलसिले में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान महिला ने निजी बातचीत और मुलाकातों से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए और बाद में उनका इस्तेमाल कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के लिए किया गया।
पुलिस के मुताबिक, महिला के पिता और वकील भी कथित वसूली के नेटवर्क में भूमिका निभाते थे। हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
₹1 करोड़ की मांग का आरोप
जांच में सामने आया कि अधिकारी से कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन वकील विजय प्रकाश ने दोपहर करीब 1:41 बजे सूर्य प्रकाश सिंह से फोन पर संपर्क किया था। पुलिस इस कॉल को जांच में अहम कड़ी मान रही है।
पुलिस का यह भी दावा है कि इसी नेटवर्क ने अन्य लोगों से भी कथित तौर पर पैसे की मांग की थी। जांचकर्ताओं को कुछ अन्य संभावित पीड़ितों के बारे में भी जानकारी मिली है और मामले की आगे जांच की जा रही है।
मोबाइल और कॉल डिटेल से खुला मामला
पुलिस ने अधिकारी के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की। इसी जांच के आधार पर तीनों आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया गया है।
DIG संजीव त्यागी के अनुसार, आरोपियों और अधिकारी के बीच संपर्क की पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इससे जुड़ी वित्तीय गतिविधियां कितनी बड़ी थीं।
पुलिस कर रही पूरे नेटवर्क की जांच
पुलिस के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं हो सकता। जांच में ऐसे अन्य लोगों की जानकारी मिलने का दावा किया गया है, जिनसे कथित तौर पर इसी तरह पैसे की मांग की गई थी।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेनदेन और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि इस कथित गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
आरोपों की जांच जारी
फिलहाल मामले में तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिस जांच आगे बढ़ रही है। हनीट्रैप, ब्लैकमेलिंग और एक करोड़ रुपये की मांग से जुड़े आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं, इसलिए आरोपियों की भूमिका को अंतिम रूप से अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि निजी जानकारी, डिजिटल बातचीत और रिकॉर्डिंग का गलत इस्तेमाल किस तरह गंभीर कानूनी विवाद में बदल सकता है। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाकर आगे की कार्रवाई कर रही है।








