क्षेत्र में इन दिनों एक भव्य और विशाल ध्वजदंड लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 26 फीट ऊंचा और 125 किलो वजनी यह पीतल का ध्वजदंड अपनी अनोखी बनावट और भव्यता के कारण दूर-दूर से आने वाले लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस ध्वजदंड का निर्माण पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक तकनीक के मेल से किया गया है। इसे तैयार करने में कारीगरों ने महीनों तक मेहनत की, ताकि इसकी मजबूती और सौंदर्य दोनों बरकरार रहें। पीतल का उपयोग इसे टिकाऊ और मौसम के प्रभाव से सुरक्षित बनाता है, जिससे यह लंबे समय तक अपनी चमक और मजबूती बनाए रख सके।
ध्वजदंड की ऊंचाई 26 फीट होने के कारण यह दूर से ही दिखाई देता है और पूरे परिसर की भव्यता को बढ़ाता है। वहीं, 125 किलो वजन इसे स्थिरता प्रदान करता है, जिससे तेज हवा या खराब मौसम में भी यह मजबूती से खड़ा रहता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस ध्वजदंड को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं और इसकी बारीक कारीगरी की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यह ध्वजदंड न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इतने बड़े और भारी ध्वजदंड का निर्माण आसान नहीं होता। इसमें संतुलन, आधार की मजबूती और धातु की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। यही कारण है कि यह निर्माण अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
फिलहाल, यह विशाल ध्वजदंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और आने वाले समय में यह एक प्रमुख पहचान के रूप में उभर सकता है।







