नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को ‘विवाह’ का दर्जा दिए जाने की मांग करने वाली पूर्व अभिनेत्री अनीता आडवाणी की याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे “लक्जरी लिटिगेशन” (विलासिता की याचिका) करार दिया।
अनीता आडवाणी, जो राजेश खन्ना के अंतिम दिनों में 2012 में उनके निधन तक उनके साथ थीं, ने बॉम्बे हाईकोर्ट के 1 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। आडवाणी का कहना था कि वे इस रिश्ते के जरिए समाज में “सम्मान और प्रतिष्ठा” की मांग कर रही हैं। हालांकि, न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि इस याचिका पर विचार करने का कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
अदालत ने कहा कि केवल लंबे समय तक साथ रहने या सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) को स्वतः ही विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता, खासकर तब जब वैवाहिक स्थिति को साबित करने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी न होती हों। शीर्ष अदालत द्वारा इस अपील को खारिज किए जाने के बाद दिवंगत अभिनेता की संपत्ति और उनके नाम से जुड़े कानूनी अधिकारों को लेकर चल रही इस लंबी लड़ाई पर अब विराम लग गया है।








