पूरे हफ्ते ज्यादातर समय बैठे रहने के बाद अगर कोई व्यक्ति अचानक वीकेंड पर तेज दौड़ने, फुटबॉल, क्रिकेट, बैडमिंटन या किसी दूसरे खेल में घंटों पसीना बहाने लगे, तो शरीर पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञ ऐसे लोगों को अक्सर ‘वीकेंड वॉरियर’ कहते हैं। नियमित तैयारी के बिना अचानक ज्यादा तीव्रता वाली गतिविधि करने से मांसपेशियों, टेंडन और जोड़ों में चोट का जोखिम बढ़ सकता है।
अचानक स्पीड बढ़ाने से क्यों बढ़ता है खतरा?
दौड़ते समय अचानक रुकना, दिशा बदलना, तेज गति पकड़ना या कूदकर गलत तरीके से उतरना घुटने पर काफी दबाव डाल सकता है। खासकर फुटबॉल, बास्केटबॉल और अन्य ऐसे खेलों में, जिनमें बार-बार दिशा बदलनी पड़ती है, ACL जैसी घुटने की चोट का जोखिम रहता है।
अगर शरीर पूरे सप्ताह सक्रिय नहीं रहा और वीकेंड पर सीधे हाई-इंटेंसिटी खेल शुरू कर दिया जाए, तो मांसपेशियां और जोड़ उस लोड के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हो सकते। इसी वजह से घुटने में मोच, मांसपेशियों में खिंचाव और अन्य स्पोर्ट्स इंजरी हो सकती हैं।
खेल शुरू करने से पहले वार्म-अप जरूरी
बिना तैयारी के सीधे दौड़ने या खेलने के बजाय पहले शरीर को धीरे-धीरे एक्टिव करना बेहतर है। हल्की गतिविधि और डायनेमिक स्ट्रेचिंग से शरीर को खेल के लिए तैयार किया जा सकता है। विशेषज्ञ भी वॉर्म-अप को स्पोर्ट्स इंजरी से बचाव का अहम हिस्सा मानते हैं।
धीरे-धीरे बढ़ाएं एक्सरसाइज
अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं करते हैं, तो अचानक लंबी दौड़ या पूरा मैच खेलने की कोशिश न करें। पहले कम अवधि और कम तीव्रता से शुरुआत करें और शरीर की क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाएं। ‘बहुत ज्यादा, बहुत जल्दी’ करने से चोट का खतरा बढ़ सकता है।
घुटनों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत रखें
घुटने की स्थिरता के लिए पैरों और कूल्हों की मांसपेशियों की ताकत महत्वपूर्ण होती है। सही तकनीक के साथ strength और balance exercises को नियमित दिनचर्या में शामिल करना स्पोर्ट्स इंजरी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
खेल के दौरान दर्द को नजरअंदाज न करें
खेलते समय अगर तेज दर्द, घुटने में सूजन, अस्थिरता या अचानक चोट महसूस हो, तो गतिविधि रोकना बेहतर है। दर्द को नजरअंदाज करके लगातार खेलते रहने से समस्या बढ़ सकती है। चोट के बाद सही जांच और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
डॉक्टरों की सलाह का सार
वीकेंड पर खेलना या दौड़ना अपने आप में खराब नहीं है। समस्या तब हो सकती है जब पूरे सप्ताह लगभग निष्क्रिय रहने के बाद शरीर को बिना तैयारी के अचानक बहुत ज्यादा मेहनत कराई जाए। इसलिए नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, उचित वार्म-अप, धीरे-धीरे बढ़ती ट्रेनिंग और सही तकनीक अपनाना चोट से बचने में मदद कर सकता है।
नोट: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। लगातार दर्द, सूजन या घुटने में अस्थिरता जैसी समस्या होने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत सलाह लेना बेहतर है।








