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May 25, 2024 1:57 pm

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Solar Thermal Cooking: स्वस्थ भारत के लिए सोलर थर्मल कुकिंग, दीपक गढ़िया और जनक पलटा मगिलिगन बोले..

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इंदौर में सोलर किचन के पहले शिल्पी ,आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित जिम्मी मगिलिगन की 13 वी पूण्यतिथि पर “सस्टेनेबलजीवन ” सप्ताह के 6 टे दिन के प्रमुख वक्ता गुजरात में बरोदरा से विश्व विख्यात विशाल सोलर किचन निर्माता दीपक गढ़िया ने सीरम नर्सिंग कालेज में विस्तार से बताया कि घरेलू उपयोग से लेकर लाखो लोगो के लिए सीधे प्रदूष्ण, सूर्य उर्जा से सोलर थर्मल कुकिंग भारत को ही नही पूरे विश्व को जलवायु संकट से बचाया जा सकता है अगर भारत सरकार चाहे और निर्णय कर ले । उन्होंने उदहारण देते हुए बताया कि महाराष्ट्र में नासिक जिले में प्रसिद्ध शिर्डी मन्दिर में उनके बनाए विश्व के दुसरे मेगा सोलर किचन में हर रोज़ 50 हजार सोलर से बने भोजन- प्रसाद का आनंद लाभ लेते है ।

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इस अत्याधुनिक किचन को सोलर कुकिंग सिस्टम का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है क्योंकि यह प्रदुषण मुक्त है। दीपक ने दिखाया कि उनके द्वारा वहां छत पर बड़ी-बड़ी 73 शेफ्लेर सोलर डिशे लगाई गई हैं । उन्होंने सबसे पहले माउंट आबू में ब्रह्मकुमारी आश्रम के 20,000 लोगों का भोजन एक टाइम बनता है इसके बाद गढ़िया ने तिरुपति मन्दिर में भी हजारों लोगों के लिए बने सोलर किचन से लेकर एक छोटे से गांव को धुआमुक्त बनाया फिर जहा वोह रहते है मुनि सेवा आश्रम ,कैलाश कैंसर हॉस्पिटल में भी सोलर किचन बनाये और जिम्मी मगिलिगन को अपना सोलर धर्म भाई बनाया और फिर मध्य प्रदेश के 500 गाँव में सोलर कुकर से महिलाये धुआं ,हिंसा व रोगमुक्त हुई ! आज प्रदूष्ण ग्रस्त नगरों और गाँव में लाखो लोगो को सोलर कूकिंग कर खाना बना उर्जा संकट व प्रय्वार्णमुक्त कर सकते है ।

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मुख्य वक्ता पद्मश्री से विभूषित जनक पलटा मगिलिगन लगभग जो पिछले चार दशकों से सोलर कुकर्स ,सोलर किचन ,सोलर ड्रायर से पूर्णतय स्वस्थ ,सस्ती ,सुंदर और टिकाऊ उर्जा से प्रयावर्ण बचाने में समर्पित है । उन्होंने बताया कि अपने पति जिम्मी मगिलिग्न के साथ मध्य प्रदेश का पहला सोलर किचन बना कर 150 लोगो का भोजन 1997 से 2024 तक बन रहा साल है के 300 दिन जब धुप रहती है तो हर महीने 900 किलो लकड़ी और 9 गैस सिलेंडर की बचत होती है जिससे न अंदर धूंआ होता है न बाहर सोलर एनर्जी बिलकुल मुफ्त मिलती है कोई बिल नही आता । सन 2011 में रिटायरमेंट लेकर जनक दीदी जबसे सनावादिया रहती है यहाँ भी उनके पति द्वारा बनाई सोलर किचन में सूर्य के साथ घूमती बड़ी डिश देख कर लाखो लोग देख कर हैरान होते है और उनके जिम्मी मगिलिग सेंटर पर 13 प्रकार के सोलर कुकर, ड्रायर , सोलर व विंडमिल से बनती हुई बिजली , गीज़र ,कंप्यूटर चलते हुए स्मार्ट, सस्ते व सरल कार्बनमुक्त को साक्षात् चलते हुए देखा और यह भी बताया कि यह सभी सस्टेनेबल है क्योंकि कार्बन नही बनती ,धुयाँ नही तो प्रदूष्ण नहीं! पेड़ पौधे से इंसानों को ही नही यहाँ के रहवासी गाय का परिवार , कुत्ता,सेंकडो पक्षी भी प्रदुषण मुक्त ,शुद्ध हवा,शुद्ध भोजन देते है । इंदौर में बरली संस्थान में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 500 से अधिक आदिवासी गांवों के लिए 6000 लड़कियों को सस्टेनेबल विकास के लिय व्यक्तिगत, परिवार और समाज के लिए प्रशिक्षित महिलाओं ने सस्टेनेबल जीवन सीखा सोलर कुकर और ड्रायर से आजीविका से आत्मनिर्भर बनी और अभी 13 साल से यही गाँव सनावादिया में भी काफी स्टार्टअप ,जैविक खेती , सोलर कुकर और ड्रायर से आत्मनिर्भर हुए ।

जनक दीदी ने कहा जो महिलाये सक्षम है उन्हें अपने खुद में वैचारिक और व्यवहारिक सामाजिक बदलाव लाना होगा उन्हें जरूरतमंद माहिलाओ को ,कुछ सम्मान, सामान या राशी देकर नही उनको गरिमामय समानता से सम्मानपुर्वक आर्थिक विकास प्रशिक्षण देना जरूरी है । उनका आत्मविश्वास बढ़ाना होगा,उन्हें आत्मनिर्भर बनाना होगा इसके साथ सामाजिक कुरीतियाँ , अपमानजनक जीवन व्यतीत करना मानव अधिकार ,सामजिक और आर्थिक न्याय मिले । उनको मोबाइल का सही उपयोग करना सिखाना जरूरी है। गाँव-गाँव जाकर उनके जीवन को समझना ,उन्हें सशक्त कर मूल्यांकन करना और उसी आधार पर कार्यक्रमों में आगे सुधार करना । जैसे हमे यह परिणाम मिला ” अब हमें मज़दूरी करने नहीं जाना पड़ता।“ तीन-चार लड़कियों ने मिलकर आलीराजपुर शहर के बाज़ार में अपनी दुकानें खोली है। वे मिलकर दुकानें चला रही हैं और यह संदेश दे रही हैं कि महिलाएँ अपना विकास अपने आप कर सकतीं है। कुँवारी लड़कियों में भी अकेली रहने की हिम्मत आ गई है। वो दूसरों को यहाँ प्रशिक्षण के लिए भेज रही हैं। ”

जनक दीदी कहती है एक बहाई होने के नाते सस्टेनेबल जीवन का मतलब ईश्वर के प्रेम के लिए “विश्व के कल्याण हेतु समस्त प्राणियो में सद्भावना से रहना व पांच तत्वों के सेवक और सरक्षक बन इन की रक्षा करना सीखना और करना है । सस्टेनेबल जीवन के लिय सबसे जरूरी है जैविक खेती से सस्टेनेबल फ़ूड । प्राकृतिक साधनों से मिले जैविक भोजन पदार्थ उगा कर सोलर कुकर , सोलर ड्रायर के उपयोग से पारंपरिक स्वस्थ भारतीय भोजन को बढ़ावा देना हमारी प्रार्थमिकता है ।

पिछले 39 वर्षों वे वह सोलर थर्मल कुकर में प्रशिक्षण और सोलर कुकिंग और खाद्य प्रसंस्करण के साथ-साथ कई स्टार्ट अप को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में पूरी तरह सलग्न है । वह संयुक्त राष्ट्र और जी 20 और भारत में कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय और सरकारी मंचों/बैठकों में सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सौर थर्मल कुकर के महत्व की वकालत करती हैं

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

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