मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस और उसके विरोधियों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस के SIR से जुड़े सवालों पर पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची में अगर अवैध या संदिग्ध नाम और मृत मतदाताओं के नाम मौजूद थे, तो इन्हें लेकर पहले सवाल क्यों नहीं उठाए गए।
निरुपम ने कांग्रेस की आलोचनाओं के जवाब में यह भी सवाल किया कि जिन नामों को SIR के दौरान हटाने या सत्यापित करने की प्रक्रिया सामने आई, क्या वे कांग्रेस के समर्थक या वोटर थे। उनके बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
SIR को लेकर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस लगातार SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से सवाल कर रही है। पार्टी ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने SIR से संबंधित निर्णयों का बचाव किया है और हाल में प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर स्पष्टीकरण भी जारी किया है।
मृत और डुप्लीकेट नामों को लेकर भी बहस
SIR के दौरान मृत मतदाताओं, स्थानांतरित मतदाताओं और एक से अधिक जगह पंजीकृत नामों की पहचान का मुद्दा भी चर्चा में है। बिहार के अंतिम मतदाता आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि बड़ी संख्या में मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाया गया। हालांकि, अलग-अलग राजनीतिक दल इस प्रक्रिया और इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर निरुपम ने कांग्रेस से सवाल किया है कि यदि मतदाता सूची में ऐसी प्रविष्टियां मौजूद थीं, तो उनके सत्यापन या हटाए जाने का विरोध क्यों किया जा रहा है।
बांग्लादेशी नागरिकों के नाम का मुद्दा
SIR की राजनीतिक बहस में बांग्लादेशी नागरिकों या कथित अवैध प्रवासियों के नाम भी एक प्रमुख मुद्दा बने हुए हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने मतदाता सूची में गैर-नागरिकों के नाम होने का आरोप लगाया है, जबकि इस तरह के दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित चुनावी सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
निरुपम ने इसी संदर्भ में कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर ऐसे नाम मतदाता सूची में थे, तो उन्हें लेकर कांग्रेस की क्या आपत्ति है। उनका बयान मौजूदा राजनीतिक विवाद में एक और प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
SIR पर जारी है राजनीतिक टकराव
SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग से प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, SIR के समर्थक पक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में मृत, डुप्लीकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना जरूरी है। चुनाव आयोग भी मतदाता सूची के सत्यापन और सुधार को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताता रहा है।
फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटना या शामिल होना संबंधित प्रक्रिया, दस्तावेजों और आपत्ति-अपील की व्यवस्था के तहत तय होता है। इसलिए किसी भी दावे पर अंतिम निष्कर्ष चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।








