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October 1, 2026 1:08 pm

सरकार पर उठ रहे सवाल, लेकिन विपक्ष के सामने भी बड़ी चुनौती; एकजुटता से लेकर रणनीति तक कई मोर्चे

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भारतीय राजनीति में इस समय केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। चुनाव आयोग, SIR यानी Special Intensive Revision और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद और अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक हित उसके सामने एक अलग चुनौती पेश कर रहे हैं।

चुनाव आयोग और SIR बना बड़ा मुद्दा

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की बैठक में इन मुद्दों पर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाया गया।

वहीं, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग रुख सामने आया है। इसलिए SIR और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद आने वाले समय में भी राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।

INDIA ब्लॉक के सामने एकजुटता की चुनौती

विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अलग-अलग दलों को साझा रणनीति पर साथ रखना है। 30 सितंबर की बैठक में AAP और DMK शामिल नहीं हुए। AAP पहले ही कह चुका है कि वह INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है, जबकि DMK ने कांग्रेस के साथ तमिलनाडु की राजनीतिक परिस्थितियों के बीच दूरी बनाई है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रहे, हालांकि उनकी पार्टी के प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी अनुपस्थिति उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से जुड़े नामांकन कार्यक्रम के कारण थी। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को सीधे गठबंधन से दूरी के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

राज्यों की राजनीति अलग तस्वीर दिखाती है

विपक्षी एकता की सबसे बड़ी पेचीदगी यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर कई दल केंद्र की नीतियों के खिलाफ साथ आते हैं, लेकिन राज्यों में वही दल एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।

कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच सीट बंटवारे, नेतृत्व और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को लेकर अलग-अलग प्राथमिकताएं हैं। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गठबंधन की राजनीति के समीकरण एक-दूसरे से काफी अलग हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर साझा रणनीति बनाना आसान नहीं है।

सरकार के सहयोगियों की भी अपनी भूमिका

दूसरी तरफ केंद्र सरकार के लिए भी गठबंधन की राजनीति महत्वपूर्ण है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिली थीं, जो बहुमत के 272 के आंकड़े से कम थीं। इसके बाद केंद्र में सरकार बनाने के लिए NDA के सहयोगी दलों का समर्थन महत्वपूर्ण रहा।

ऐसे में सहयोगी दलों के रुख का महत्व बढ़ जाता है। समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर सहयोगी दलों की अपनी राय और प्राथमिकताएं सामने आती रही हैं। इससे पता चलता है कि गठबंधन सरकार में हर मुद्दे पर सभी सहयोगियों की स्थिति एक जैसी होना जरूरी नहीं है।

विपक्ष के सामने सिर्फ सरकार को घेरने की चुनौती नहीं

मौजूदा राजनीतिक स्थिति में विपक्ष के सामने दो स्तरों पर चुनौती है। पहला, चुनाव आयोग और SIR जैसे मुद्दों पर सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक और कानूनी रणनीति तैयार करना। दूसरा, अलग-अलग राज्यों में अपने सहयोगी दलों के बीच मतभेदों को संभालना।

INDIA ब्लॉक ने 2 से 8 अक्टूबर के बीच ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और अन्य कार्यक्रमों की घोषणा की है। इसके जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े अपने मुद्दों को जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रहा है।

कुल मिलाकर, मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में सरकार के सामने विपक्ष के सवाल और विपक्ष के सामने अपनी एकजुटता कायम रखने की चुनौती—दोनों साथ दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अलग-अलग राजनीतिक दल साझा मुद्दों पर कितनी निरंतरता के साथ साथ आते हैं और राज्यों के अपने-अपने राजनीतिक समीकरणों को किस तरह संभालते हैं।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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