घटना का पूरा विवरण
आज सुबह विधान परिषद सभापति के समक्ष नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफा मात्र 29 शब्दों का था, लेकिन उसने पूरे बिहार राजनीति को हिला दिया। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। संविधान के अनुसार, किसी व्यक्ति को एक समय में दो सदनों का सदस्य नहीं बनना होता, इसलिए 14 दिनों के अंदर MLC पद छोड़ना जरूरी था।
जब नीतीश कुमार ने इस्तीफा सौंपा, तो वहां मौजूद JDU के वरिष्ठ नेता और मंत्री अशोक चौधरी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया। अशोक चौधरी ने कहा, “नीतीश जी का जाना हमारे लिए अपूरणीय क्षति है। वे बिहार के विकास के प्रतीक रहे हैं।” उनकी सिसकियां सुनकर वहां मौजूद अन्य नेता भी भावुक हो गए।
इसी दिन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी बांकीपुर सीट से अपना MLA इस्तीफा दे दिया। नितिन नवीन भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।
नीतीश युग का अंत?
नीतीश कुमार पिछले दो दशक से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे हैं। उनके MLC इस्तीफे के साथ “नीतीश युग” के अंत की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। JDU नेताओं की बैठक में नए सीएम के नाम पर चर्चा चल रही है। संजय कुमार झा, लालन सिंह और अन्य नेताओं के नाम चल रहे हैं।
नितिन नवीन ने इस्तीफा देते हुए कहा, “जनता ही मेरा परिवार है। बांकीपुर की जनता का आभार।”
राजनीतिक हलचल तेज
- नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद पटना में JDU और NDA नेताओं की बैठकें शुरू हो गई हैं।
- नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर कयासबाजी तेज।
- विपक्षी दलों (RJD-Congress) ने इसे “सत्ता की सौदेबाजी” बताया है।
JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालन सिंह ने कहा, “नीतीश जी का फैसला पार्टी और बिहार के हित में है। वे अब राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की आवाज बनेंगे।”
संवैधानिक प्रक्रिया
- नीतीश कुमार और नितिन नवीन दोनों 30 मार्च से पहले इस्तीफा देकर राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकेंगे।
- विधान परिषद और विधानसभा में अब इन सीटों पर उपचुनाव होंगे।
यह दिन बिहार की राजनीति के लिए यादगार रहा। एक तरफ भावुक क्षण, दूसरी तरफ बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत। आम जनता अब नई सरकार और नए समीकरणों का इंतजार कर रही है।







