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October 28, 2026 3:31 pm

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विशेष गहन पुनरीक्षण पर मोदी सरकार को मिला चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण का खुला समर्थन

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नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान और चुनाव प्रणाली पर विपक्षी दलों के बढ़ते हमलों के बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को दक्षिण भारत के प्रमुख राजनीतिक दिग्गजों का सशक्त समर्थन मिला है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और उप मुख्यमंत्री तथा जन सेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया का पुरजोर समर्थन किया है।

यह राजनीतिक समर्थन सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए ऐसे नाजुक समय में राहत लेकर आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल विरोध रैली की तैयारी की जा रही है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पीवीएन माधव के साथ आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में विपक्षी खेमे की मंशा पर सवाल उठाए। नायडू ने कड़े शब्दों में कहा कि जब भी चुनाव परिणाम विपक्षी दलों की उम्मीदों के विपरीत आते हैं, तो वे अपनी राजनीतिक विफलताओं का विश्लेषण करने के स्थान पर संवैधानिक संस्थाओं और समूची चुनावी व्यवस्था पर संदेह जताने लगते हैं।

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के संबंध में चल रहे विवाद पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि ईवीएम को कांग्रेस के शासनकाल में ही भारतीय चुनाव प्रणाली में शामिल किया गया था। विपक्षी दलों का यह दोहरा मापदंड है कि चुनाव जीतने पर वे इन्हीं मशीनों को प्रमाणिक मानते हैं और पराजय मिलते ही इनकी विश्वसनीयता पर आरोप मढ़ने लगते हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों के बूथ-स्तरीय एजेंटों को गणना प्रक्रिया में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया गया था और संपूर्ण व्यवस्था का समन्वय बूथ-स्तरीय अधिकारियों द्वारा किया जा रहा था। जब यह प्रक्रिया धरातल पर क्रियान्वित की जा रही थी, तब विपक्षी नेताओं ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

वाईएसआरसीपी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी की आलोचना करते हुए नायडू ने कहा कि वे राजनीतिक सहूलियत के आधार पर एसआईआर पर अपना दृष्टिकोण बदलते रहते हैं, जो कि अवसरवादिता की राजनीति है। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों पर पूर्व में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में सीसीटीवी कैमरों की सख्त निगरानी अत्यंत प्रभावी साबित हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम में एनडीए के घटक दल पूरी मजबूती से एक साथ नजर आ रहे हैं। केंद्र सरकार को जनता दल (यूनाइटेड), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार), जनता दल (सेक्युलर), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक दल, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, असम गण परिषद, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और अपना दल (सोनेलाल) जैसी प्रांतीय शक्तियों का समर्थन हासिल है।

हालांकि, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगियों ने निर्वाचन आयोग से यह आग्रह भी किया है कि आम लोगों के मन में बने भ्रम को दूर करने के लिए पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए।

इसके विपरीत, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी और वामपंथी दलों के साथ-साथ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस प्रक्रिया का लगातार विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मतदाता सूची से मृत, फर्जी या स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। इसकी शुरुआत जून 2025 में बिहार से हुई थी, जहां 60 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए थे। बाद में इसे अन्य राज्यों में भी लागू किया गया, जहां 2002 अथवा 2003 की मतदाता सूचियों को आधार मानकर सत्यापन किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के बाद पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड को भी इस प्रक्रिया में स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में शामिल कर लिया गया है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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