नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्ज करने की व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया है कि ट्रेनों के एसी कोच में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट बंद रखे जाएं। यह निर्देश दक्षिण पूर्व रेलवे में चार्जिंग के दौरान एक यात्री का पावर बैंक फटने और उससे धुआं निकलने की घटना के बाद फिर से सख्ती से लागू करने को कहा गया है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा संबंधी इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
रेलवे बोर्ड के अनुसार, हाल ही में दक्षिण पूर्व रेलवे में एक ऐसी घटना सामने आई, जिसमें निर्धारित समय के दौरान ट्रेन के कर्मचारियों ने चार्जिंग पॉइंट बंद नहीं किए थे। इसी दौरान एक यात्री का पावर बैंक चार्ज होते समय फट गया और उसमें से धुआं निकलने लगा। इस घटना ने ट्रेन के डिब्बों में रात के समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज करने से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को फिर से उजागर कर दिया है। रेलवे बोर्ड ने 26 अक्टूबर को जारी पत्र में सभी रेलवे जोन को वर्ष 2014 में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। साथ ही संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने और नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए औचक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वर्ष 2014 के आदेश को फिर से लागू करने पर जोर
ट्रेनों के डिब्बों में चार्जिंग पॉइंट बंद रखने का निर्देश रेलवे बोर्ड ने पहली बार जून 2014 में जारी किया था। यह फैसला वर्ष 2013 में दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु मंडल में हजूर साहिब नांदेड़-केएसआर बेंगलुरु एक्सप्रेस के एसी थ्री-टियर कोच में आग लगने की घटना के बाद लिया गया था। उस घटना की जांच के दौरान रेलवे सुरक्षा आयुक्त, दक्षिणी सर्किल ने एसी कोच में रात के समय मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्ज करने के लिए उपलब्ध बिजली के पॉइंट बंद रखने की सिफारिश की थी। सिफारिश में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक चार्जिंग पॉइंट का इस्तेमाल रोकने का सुझाव दिया गया था।
हालांकि, रेलवे बोर्ड ने अपने निर्देश में समय की अवधि रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक निर्धारित की। बोर्ड ने सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एसी कोच में मोबाइल फोन और लैपटॉप चार्ज करने के लिए लगाए गए बिजली के पॉइंट इस अवधि में बंद रखने की सलाह दी थी। इसके अलावा, सभी एसी कोच में निर्धारित स्थानों पर सूचना संबंधी स्टिकर लगाने के निर्देश भी दिए गए थे, ताकि यात्रियों को इस व्यवस्था की जानकारी पहले से मिल सके। अब रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को पुराने आदेश का सख्ती से पालन कराने और कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा है।
स्लीपर कोच में भी चार्जिंग पॉइंट बंद रखने की सिफारिश
ट्रेनों में आग लगने का खतरा केवल एसी कोच तक सीमित नहीं है। नवंबर 2023 में उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में सराय भोपत-इटावा रेलखंड पर नई दिल्ली-दरभंगा हमसफर क्लोन स्पेशल ट्रेन के स्लीपर श्रेणी के एक कोच में शाम करीब 5 बजकर 25 मिनट पर आग लग गई थी। आग ने पूरे कोच को अपनी चपेट में ले लिया और आसपास के डिब्बे भी प्रभावित हुए थे। इस घटना के बाद रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने सिफारिश की थी कि एसी कोच की तरह स्लीपर श्रेणी के डिब्बों में भी निर्धारित समय के दौरान चार्जिंग पॉइंट बंद रखने की व्यवस्था लागू की जाए।
हालांकि, रेलवे बोर्ड ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में बताया था कि एसी कोच में तय समय के दौरान चार्जिंग पॉइंट पहले से ही बंद किए जा रहे हैं। वहीं, गैर-एसी कोच में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती को व्यावहारिक नहीं माना गया था। बोर्ड के अनुसार, सभी गैर-एसी कोच में इस व्यवस्था की निगरानी के लिए कर्मचारियों को तैनात करने पर काफी खर्च आएगा। ऐसे में स्लीपर और अन्य गैर-एसी कोच में इस नियम को लागू करने को लेकर अलग-अलग स्तर पर विचार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि सभी स्लीपर कोच में चार्जिंग पॉइंट बंद करने का कोई नया, समान रूप से लागू होने वाला आदेश जारी किया गया है या नहीं।
रेलवे जोन ने आग और चोरी के खतरे को लेकर जताई चिंता
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने भी इस साल 6 मार्च को अपने मंडलों को रात के समय चार्जिंग पॉइंट बंद रखने से संबंधित निर्देशों का पालन कराने के लिए कहा था। रेलवे जोन ने बताया था कि नागपुर मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों के एसी कोच में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट कई बार पूरी रात चालू रहते हैं, जबकि यह रेलवे बोर्ड के निर्देशों के विपरीत है। जोन ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि रात के समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिना निगरानी के चार्जिंग पर छोड़ना यात्रियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, चार्जिंग के दौरान किसी उपकरण या पावर बैंक में खराबी आने से आग लगने की आशंका रहती है। रात के समय यात्री सो रहे होते हैं, ऐसे में धुआं निकलने या आग लगने की स्थिति में खतरे का पता चलने में देरी हो सकती है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल फोन को बिना निगरानी के चार्जिंग पर छोड़ने से चोरी की आशंका भी बढ़ सकती है। रेलवे बोर्ड के ताजा निर्देशों का उद्देश्य ऐसी घटनाओं की आशंका कम करना और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को निर्देशों के अनुपालन पर विशेष ध्यान देने, कर्मचारियों को नियमों की जानकारी देने और समय-समय पर औचक निरीक्षण करने को कहा है। यात्रियों के लिए इसका अर्थ है कि निर्धारित समय के दौरान एसी कोच के चार्जिंग पॉइंट बंद रहने पर वे मोबाइल फोन या लैपटॉप चार्ज नहीं कर सकेंगे। इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इस व्यवस्था का ध्यान रखना होगा और रात में सोने से पहले अपने जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चार्ज कर लेना चाहिए।








