कोच्चि। केरल के कोच्चि शहर में एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे द्वारा मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को टक्कर मारे जाने के गंभीर मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इस मामले में पुलिस की घोर लापरवाही और ढिलाई को लेकर चौतरफा हो रही आलोचनाओं के बाद कोच्चि शहर के पुलिस आयुक्त कालीराज महेश कुमार का स्थानांतरण कर दिया गया है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने जांच प्रक्रिया में हुई त्रुटियों और खामियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हुए इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर को कोच्चि में घटी थी, जब तेज रफ्तार मर्सिडीज कार ने एक स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन की जान चली गई। हादसे के बाद से ही मृतक के परिजनों ने मामले को दबाने और जांच को बाधित करने की साजिश का आरोप लगाया था। पुलिस द्वारा आरोपी नाबालिग को हादसे के कुछ ही घंटों भीतर दो बार जमानत दिए जाने के बाद स्थानीय निवासियों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठने लगे।
स्थानांतरण की इस कार्रवाई से एक दिन पहले पुलिस दल ने अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के आवास पर छापेमारी कर जांच के सिलसिले में सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ली। यह तलाशी उस समय हुई जब मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए के तहत न्यायाधीश को भी आरोपी बनाया गया, जिसके तहत किसी नाबालिग द्वारा अपराध किए जाने पर उसके अभिभावक या वाहन के पंजीकृत मालिक को जिम्मेदार ठहराया जाता है। केरल उच्च न्यायालय द्वारा न्यायाधीश को आरोपी बनाने की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने यह कदम उठाया।
राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने स्वीकार किया कि शुरुआती जांच में पुलिस गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी उपयुक्त कानूनी धाराएं लगाने में विफल रही थी। मंत्री ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने पुलिस महानिदेशक से संपर्क किया और अपर पुलिस अधीक्षक पी विजयन को पीड़ित परिवार से मिलने भेजा। अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर मामले में लापरवाही बरतने वाले चार पुलिसकर्मियों, जिनमें एक सर्किल इंस्पेक्टर, एक स्टेशन हाउस ऑफिसर, एक ग्रेड सब-इंस्पेक्टर और एक असिस्टेंट सिविल पुलिस ऑफिसर शामिल हैं, को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
दुर्घटना के तुरंत बाद रविवार शाम को आरोपी नाबालिग को स्टेशन से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों के भारी विरोध के बाद उसे पुनः हिरासत में लिया गया। जब उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, तो बोर्ड ने उसे फिर से जमानत दे दी। गृह मंत्री ने पीड़ित का अंतिम संस्कार होने से पहले ही जमानत दिए जाने पर नाराजगी जताई। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली के विरोध में सदन से वाकआउट किया।
जांच में सामने आई एक वीडियो रिकॉर्डिंग से पता चला है कि हादसे के वक्त नाबालिग की कार लगभग 104 किलोमीटर प्रति घंटे की अत्यधिक रफ्तार से दौड़ रही थी। शुरुआत में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था। हालांकि, विरोध प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने धारा बदलकर बीएनएस की धारा 105 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब इसकी आगे की जांच जिला अपराध शाखा को सौंप दी गई है।








