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February 12, 2026 12:24 pm

UN में फंसा था ईरान, तभी डंके की चोट पर भारत ने दिया साथ, भौंचक्के रह गए नाटो-पश्चिमी देश

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जिनेवा/नई दिल्ली, 24 जनवरी 2026 संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के विशेष सत्र में ईरान की हालिया विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों को लेकर पश्चिमी देशों ने शुक्रवार को एक सख्त प्रस्ताव पेश किया। लेकिन भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ ‘नो’ वोट देकर ईरान का मजबूत समर्थन किया। इस कदम से अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया जैसे पश्चिमी देश और उनके सहयोगी पूरी तरह चौंक गए।

प्रस्ताव में ईरान की हाल की कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की गई थी और हजारों मौतों से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग मिशन के कार्यकाल को बढ़ाने का आदेश दिया गया था। प्रस्ताव पर वोटिंग में कुल 25 देशों ने पक्ष में मत दिया, जबकि 7 देशों ने विरोध में वोट किया और 14 ने मतदान से परहेज (अब्स्टेनशन) किया।

विरोध में वोट देने वाले देशों में भारत के अलावा चीन, क्यूबा, इंडोनेशिया, इराक, पाकिस्तान और वियतनाम शामिल थे। भारत का यह रुख उसकी लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति को दर्शाता है, जिसमें वह किसी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता रहा है।

भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि भारत मानवाधिकारों का सम्मान करता है, लेकिन किसी भी देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में दखल को स्वीकार नहीं करता। भारत ने इस प्रस्ताव को “एकतरफा” और “राजनीतिक रूप से प्रेरित” करार दिया।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को एक बार फिर रेखांकित किया। ईरान के लिए यह मजबूत नैतिक और कूटनीतिक समर्थन साबित हुआ, खासकर तब जब पश्चिमी देश उसे अलग-थलग करने की कोशिश में जुटे थे।

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी, चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाएं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों का सहयोग इस फैसले के पीछे प्रमुख कारण हैं। भारत ने साफ संकेत दिया कि वह दोस्ती निभाने में पीछे नहीं हटता, खासकर मुश्किल वक्त में।

पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया पश्चिमी राजनयिकों ने भारत के इस कदम पर आश्चर्य जताया। कुछ ने इसे “लोकतंत्र के पैमाने पर सवाल” बताया, जबकि अन्य ने इसे भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” का हिस्सा माना।

ईरान ने भारत के समर्थन का स्वागत किया और इसे “सच्ची दोस्ती” का प्रतीक बताया।

यह घटना वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका और उसकी “सभी के साथ संबंध, किसी के साथ गठबंधन नहीं” वाली नीति को रेखांकित करती है।

DIYA Reporter
Author: DIYA Reporter

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