मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत को साफ तौर पर ठुकरा दिया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इस बीच, हालात को संभालने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को फोन किया और स्थिति पर विस्तृत चर्चा की।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी नई वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका की नीतियां “दबाव और प्रतिबंध” पर आधारित हैं, ऐसे में बातचीत का कोई सार्थक परिणाम निकलना मुश्किल है। ईरान पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि वह समान सम्मान और बिना शर्तों के ही किसी भी कूटनीतिक संवाद के लिए तैयार होगा।
इसी बीच, पाकिस्तान ने खुद को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र में शांति बनाए रखने और कूटनीतिक समाधान खोजने पर जोर दिया। सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इस्लामाबाद के दोनों देशों के साथ संबंध अपेक्षाकृत संतुलित हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जमी बर्फ पिघल पाएगी या नहीं।
वर्तमान स्थिति में, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही कई मुद्दों को लेकर चरम पर है—चाहे वह परमाणु कार्यक्रम हो, क्षेत्रीय प्रभाव की होड़ या आर्थिक प्रतिबंध। ऐसे में बातचीत से ईरान का पीछे हटना संकेत देता है कि आने वाले समय में कूटनीतिक रास्ता और कठिन हो सकता है।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शहबाज शरीफ की “फोन डिप्लोमेसी” कोई ठोस परिणाम ला पाएगी या फिर यह गतिरोध और गहराता जाएगा।







