बेंगलुरु: भारत में त्योहारों का सीजन अपने चरम पर है, जिसमें ऑनलाइन खरीदारी, बड़ी संख्या में डिजिटल लेनदेन और भारी छूट वाली सेल देखने को मिल रही है। ऐसे में, प्रमुख साइबर सुरक्षा कंपनी ‘सिक्योरआईज़’ (SecurEyes) ने नागरिकों और व्यवसायों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। साइबर अपराधी लोगों के त्योहारों के उत्साह और तेजी से खरीदारी करने की प्रवृत्ति का फायदा उठाकर, डिजिटल धोखाधड़ी की जटिल घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
इन खतरों के दायरे और समय पर प्रकाश डालते हुए, ‘सिक्योरआईज़’ (SecurEyes) के सह-संस्थापक और सीईओ, करमेंद्र कोहली ने चेतावनी दी:
“दुर्भाग्य से, त्योहारों का मौसम साइबर अपराधियों के लिए सक्रिय होने का मुख्य समय बन गया है। हमलावर लोगों के उत्साह, ऑनलाइन खरीदारी में अचानक आई तेजी और भारी छूट वाले ऑफर्स का फायदा उठाते हैं। वे लोगों को तब निशाना बनाते हैं जब वे असावधान होते हैं। कर्नाटक के गृह मंत्री, जी. परमेश्वर के अनुसार, केवल 2025 में ही कर्नाटक को साइबर धोखाधड़ी के कारण 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है—यह इस बात का एक बड़ा संकेत है कि ये खतरे कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं।”
त्योहारी सीजन में होने वाले घोटालों की पड़ताल
हमलावर लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए डर, भरोसा और लालच जैसी मानवीय भावनाओं का फायदा उठाते हैं। वे जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं, लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं, या उन्हें अलग-थलग महसूस कराते हैं, ताकि वे दबाव में आकर उनके जाल में फंस जाएं। इसलिए, साइबर हमलों से बचने के लिए जागरूक रहना, जल्दबाजी न करना, जानकारी की पुष्टि करना और रिपोर्ट करना बहुत जरूरी है।
धोखाधड़ी करने वाले लोग ‘फ्लैश सेल’ और सीमित समय के लिए मिलने वाली त्योहारी डील्स के दौरान लोगों की जल्दबाजी में फैसले लेने की आदत का फायदा उठाते हैं। वे असली दिखने वाले ब्रांड विजुअल्स, नकली लैंडिंग पेज और ‘जल्दबाजी’ जैसे मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके लोगों को फंसाते हैं। इसके कुछ मुख्य तरीके इस प्रकार हैं:
फिशिंग लिंक और नकली वाउचर: SMS, ईमेल या WhatsApp पर ‘फेस्टिव गिफ्ट कार्ड’ या ‘मेगा डील’ का लालच देकर ऐसे लिंक भेजे जाते हैं, जो आपको नकली वेबसाइटों पर ले जाते हैं। वहां आपसे बैंकिंग लॉगिन और UPI पिन जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा ली जाती है।
नकली शॉपिंग पोर्टल: ये ऐसी फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइटें होती हैं जो असली रिटेलर्स जैसी दिखती हैं। ये महंगी इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वेलरी पर भारी छूट का लालच देती हैं। पैसे का भुगतान करने के बाद, या तो ये वेबसाइटें गायब हो जाती हैं या फिर नकली सामान भेज देती हैं।
पहचान बदलकर धोखाधड़ी (इम्पर्सनेशन): इसमें जालसाज बैंक अधिकारी, डिलीवरी पार्टनर या ई-कॉमर्स कस्टमर सपोर्ट बनकर कॉल या मैसेज करते हैं। वे दावा करते हैं कि आपके अकाउंट या डिलीवरी में कोई जरूरी समस्या है, और इस तरह आपसे OTP मांग लेते हैं।
QR कोड का जाल: त्योहारी कैशबैक या इनाम देने के बहाने फर्जी QR कोड बांटे जाते हैं। इन कोड को स्कैन करने पर आपके अकाउंट में पैसे आने के बजाय, आपके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं।
त्योहारी सीजन में सुरक्षित शॉपिंग के लिए जरूरी सुरक्षा दिशा-निर्देश
‘सिक्योरआईज’ (SecurEyes) सलाह देता है कि खरीदारी करते समय पूरी सावधानी बरतें और पैसे का लेनदेन करने से पहले सभी माध्यमों की अच्छी तरह जांच कर लें।
डिजिटल सुरक्षा के पांच जरूरी नियम:
‘बहुत ज्यादा अच्छी लगने वाली’ डील्स से सावधान रहें: अगर किसी डील में बहुत ज्यादा छूट (जैसे प्रीमियम स्मार्टफोन पर 80-90% की छूट) मिल रही है, तो समझ लें कि यह कोई फर्जी वेबसाइट हो सकती है।
वेबसाइट की सीधे जांच करें: SMS या मैसेजिंग ऐप्स में आए किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए सीधे उनके आधिकारिक मोबाइल ऐप या असली वेबसाइट URL का ही इस्तेमाल करें।
वेब सुरक्षा की जांच करें: ध्यान रखें कि वेबसाइट का पता ‘https://’ से शुरू हो और वहां एक ‘लॉक’ (lock) का आइकन दिख रहा हो। साथ ही, डोमेन नाम की स्पेलिंग को भी ध्यान से देखें, कहीं उसमें कोई छोटी-मोटी गलती तो नहीं है। गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें: वैध संस्थान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बैंक कभी भी ग्राहकों से संपर्क करके उनसे वन-टाइम पासवर्ड (OTP), PIN या कार्ड की जानकारी नहीं मांगते हैं।
मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) चालू करें: अतिरिक्त सुरक्षा के लिए बैंकिंग, ई-कॉमर्स और अपने मुख्य निजी खातों में ‘टू-स्टेप वेरिफिकेशन’ (दो-चरणीय सत्यापन) को सक्रिय करें।
डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए जरूरी सतर्कता पर बात करते हुए, श्री कोहली ने जोर देकर कहा:
“डिजिटल खतरों के खिलाफ सतर्कता ही हमारा सबसे मजबूत बचाव है। साइबर सुरक्षा केवल एक तकनीकी परत नहीं है; यह हमारी रोजमर्रा की सामान्य डिजिटल आदतों पर टिकी है। सतर्क रहकर और हर लेनदेन की पुष्टि करके, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि त्योहारों का यह समय खुशी का ही रहे, न कि किसी वित्तीय परेशानी का।”








