क्या आपका ब्लड ग्रुप डायबिटीज के खतरे से जुड़ा हो सकता है? A, B, AB और O जैसे ABO ब्लड ग्रुप को लेकर हुई कुछ वैज्ञानिक रिसर्च में इनके और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच संभावित संबंध पाया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी खास ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को डायबिटीज होना तय है। डायबिटीज का जोखिम उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि, खान-पान, पारिवारिक इतिहास और कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
किस ब्लड ग्रुप में ज्यादा जोखिम देखा गया?
कुछ बड़े observational studies में A और B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में O ब्लड ग्रुप की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कुछ अधिक पाया गया। एक प्रसिद्ध अध्ययन में B पॉजिटिव और AB पॉजिटिव समेत कुछ गैर-O ब्लड ग्रुप में जोखिम बढ़ा हुआ देखा गया था।
लेकिन इन अध्ययनों से यह साबित नहीं होता कि ब्लड ग्रुप स्वयं डायबिटीज का कारण है। शोध में दिखाई देने वाला संबंध कई जैविक और अन्य स्वास्थ्य कारकों से प्रभावित हो सकता है।
O ब्लड ग्रुप को लेकर क्या सामने आया?
कई अध्ययनों में O ब्लड ग्रुप को टाइप-2 डायबिटीज के लिहाज से अपेक्षाकृत कम जोखिम से जोड़ा गया है। इसके विपरीत, A और B समूहों में कुछ शोधों ने अधिक जोखिम का संबंध दिखाया है।
हालांकि, किसी व्यक्ति का O ब्लड ग्रुप होना उसे डायबिटीज से सुरक्षित नहीं बनाता। यदि किसी व्यक्ति की जीवनशैली अस्वस्थ है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, तो उसे भी बीमारी हो सकती है।
ऐसा क्यों हो सकता है?
वैज्ञानिकों ने ब्लड ग्रुप और मेटाबॉलिक बीमारियों के बीच संभावित संबंध को समझने के लिए कई जैविक प्रक्रियाओं पर अध्ययन किया है। ABO ब्लड ग्रुप से जुड़े कुछ जैविक मार्कर और रक्त में मौजूद प्रोटीन शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं से जुड़े हो सकते हैं।
कुछ शोधों में गैर-O ब्लड ग्रुप को रक्त के थक्के बनने और कुछ सूजन संबंधी प्रक्रियाओं से जुड़े कारकों के साथ जोड़ा गया है। लेकिन ब्लड ग्रुप और डायबिटीज के बीच सटीक जैविक संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि केवल A, B या AB ब्लड ग्रुप होने की वजह से किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाएगी।
डायबिटीज का असली जोखिम किन चीजों से बढ़ता है?
टाइप-2 डायबिटीज के लिए कई स्थापित जोखिम कारक हैं। इनमें अधिक वजन या मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, परिवार में डायबिटीज का इतिहास, बढ़ती उम्र और असंतुलित खान-पान प्रमुख हैं।
इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर और कुछ अन्य मेटाबॉलिक स्थितियां भी डायबिटीज के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए केवल ब्लड ग्रुप देखकर किसी व्यक्ति का डायबिटीज जोखिम तय नहीं किया जा सकता।
ब्लड ग्रुप देखकर टेस्ट की जरूरत तय नहीं होती
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड ग्रुप A, B या AB है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे सामान्य व्यक्ति की तुलना में निश्चित रूप से डायबिटीज होगी। इसी तरह O ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को भी नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वस्थ जीवनशैली की जरूरत होती है।
डायबिटीज की जांच आमतौर पर ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसे परीक्षणों से की जाती है। किस उम्र में और कितनी बार जांच करानी चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर तय कर सकते हैं।
खान-पान और एक्टिविटी पर दें ध्यान
डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखने पर ध्यान देना फायदेमंद हो सकता है।
अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या पहले से ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर समय-समय पर जांच कराना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष
रिसर्च में गैर-O ब्लड ग्रुप और टाइप-2 डायबिटीज के बीच संभावित संबंध सामने आया है, लेकिन ब्लड ग्रुप को डायबिटीज का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। A, B, AB और O में से किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को डायबिटीज हो सकती है।
इसलिए सिर्फ अपने ब्लड ग्रुप के आधार पर चिंता करने के बजाय ब्लड शुगर की नियमित जांच, संतुलित खान-पान, शारीरिक सक्रियता और डॉक्टर की सलाह पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।








