इंदौर (विशेष संवाददाता) लायंस इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3233 G-2 एवं श्री वल्लभ आनंद क्लब के संयोजन में पर्यावरण विभाग, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पर्यावरण सेवा सप्ताह का समापन एक दिवसीय कार्यशाला “पर्यावरणीय जागरूकता” के रूप में हुआ।
कार्यशाला का शुभारंभ प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री सम्मानित डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
डॉ. जनक पलटा मगिलिगन का प्रेरक उद्बोधन
जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की निदेशिका डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा:
“1964 में भारत की पहली सफल ओपन हार्ट सर्जरी के बाद जब मैं होश में आई, तो ईश्वर से कहा था कि आपने मुझे नया जीवन दिया है, इसे मैं आपके धन्यवाद में ही बिताऊंगी। बहाई धर्म पढ़ने के बाद समझ आया कि सस्टेनेबल जीवन का मतलब है — ईश्वर के प्रेम में विश्व के कल्याण हेतु समस्त प्राणियों में सद्भावना रखना और पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के सेवक व संरक्षक बनना।”
उन्होंने बताया कि 1985 में चंडीगढ़ छोड़कर अकेले इंदौर आईं और आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बरली ग्रामीण महिला संस्थान की स्थापना की। 6 एकड़ बंजर भूमि पर 26 वर्षों तक 500 से अधिक ग्रामीण एवं आदिवासी महिलाओं को साक्षरता, स्वास्थ्य, जैविक खेती और सतत विकास का प्रशिक्षण दिया।
उनके पति स्वर्गीय जिम्मी मगिलिगन ने सोलर कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए अभूतपूर्व कार्य किया। उन्होंने कई दूरदराज के घरों में सोलर कुकर और सोलर बिजली पहुंचाई। प्रशिक्षित महिलाओं ने बताया कि सोलर कुकरों के उपयोग से वे गर्भपात और यौन उत्पीड़न से बचीं।
बरली से रिटायरमेंट के बाद 2010 में सनावादिया गांव में रहने के लिए घर बनाते समय उन्होंने पहले 50 आदिवासी भूमिहीन परिवारों के लिए 2 किलोवाट सोलर और विंडमिल लगवाया।
डॉ. जनक पलटा मगिलिगन ने कहा,
“हमारे पास यह चॉइस नहीं है कि हम मरेंगे कैसे, लेकिन यह चॉइस अवश्य है कि हम कैसे जीएंगे। जब तक हम अपना जीवन प्रकृति और दूसरों के हित के लिए नहीं जीते, तब तक जीवन अधूरा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण शब्दों से नहीं, एक्शन से होता है। उन्होंने स्वयं सनावादिया गांव में पूर्णतः सस्टेनेबल जीवन जीते हुए बताया कि उनके घर में बाहर से कुछ नहीं आता — सब कुछ स्वयं उगाया और सोलर ऊर्जा से तैयार किया जाता है।
अन्य वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सलूजा ने कहा कि माइक्रोवेव में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के सूक्ष्म कण हमारे शरीर में प्रवेश कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। उन्होंने दैनिक जीवन में प्लास्टिक के उपयोग पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया।
राज्य आनंद संस्थान के जिला संयोजक डॉ. प्रवीण जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह हमारे आचरण में दिखना चाहिए। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण ही आनंदमय जीवन का आधार है।”
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजन से हुआ।
अतिथियों का स्वागत लायंस क्लब की सीईओ एवं श्री वल्लभ आनंद क्लब की संस्थापक श्रीमती मधु गुप्ता द्वारा किया गया।
सेवानिवृत्त डीएसपी श्री सुभाष दुबे ने पर्यावरण विषयक गीत प्रस्तुत किया।
सिटी किंडरगार्टन स्कूल के स्टाफ द्वारा लघु नाटिका का मंचन किया गया।
समारोह के अंत में डॉ. जनक पलटा मगिलिगन को शाल, श्रीफल एवं पुष्पहार से सम्मानित किया गया।
वृक्ष मित्र श्री अजय भातखंडे, श्री अमिताभ सुधांशु एवं श्री के.के. पवार को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. अनुराग तिवारी, आभा तिवारी, अद्वै तिवारी, लायंस सेक्रेटरी सुशील पोरवाल, श्री मुक्तेश त्रिवेदी, डॉ. सुमन जैन, श्रीमती अमृता चतुर्वेदी, सुश्री रंजना मालवीय, श्रीमती संध्या सक्सेना, श्रीमती अरुंधति पेड़ाढारकर सहित बड़ी संख्या में प्रोफेसर, विद्यार्थी और विभिन्न लायंस क्लब के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ललित नागर ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती अरुंधति पेंढारकर ने किया।







