नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सह-संयोजकों सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ बैठक करने के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। दीपके ने यह भी स्वीकार किया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आंदोलन के तरीकों में कुछ बदलाव करने की जरूरत है। उनके इस बयान के बाद संगठन के भविष्य और आंदोलन की अगली दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, सौरभ दास और आशुतोष रांका को एक सप्ताह से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा था। इस दौरान अभिजीत दीपके ने वीडियो संदेश के जरिए अपने समर्थकों से कुछ समय के लिए घर लौटने और परिवार के साथ वक्त बिताने की अपील की थी। उन्होंने दिवाली तक आंदोलन को विराम देने की बात कही थी। संगठन के नेताओं के सामने आ रही कानूनी चुनौतियों और आंदोलन में अस्थायी विराम के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या सीजेपी का अभियान कमजोर पड़ गया है या संगठन किसी नई रणनीति के साथ दोबारा सक्रिय होने की तैयारी कर रहा है।
एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में जब अभिजीत दीपके से पूछा गया कि आगे उनकी क्या योजना है और क्या सीजेपी का आंदोलन खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है, तो उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति अभी तय की जानी है। उन्होंने बताया कि उनकी सौरभ दास और आशुतोष रांका से अभी मुलाकात नहीं हुई है। दीपके के मुताबिक, उन्होंने दोनों साथियों से पहले अपने परिवार के साथ दो-तीन दिन बिताने और उसके बाद मिलने को कहा है। उन्होंने संकेत दिया कि आपसी चर्चा के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नए सिरे से योजना बनाई जाएगी।
संगठन के भविष्य पर उठ रहे सवालों के जवाब में दीपके ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स टेस्ट मैच का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस मुकाबले में एक समय ऐसा लग रहा था कि भारतीय टीम हार के करीब पहुंच गई है। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर कर दिया था और मुकाबले में भारतीय टीम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थी। हालांकि, इसके बाद राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के बीच हुई शानदार साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया और भारत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। दीपके ने सौरभ दास और आशुतोष रांका के जेल में बिताए समय की तुलना इसी साझेदारी से करते हुए कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद दोनों अपने इरादों पर कायम रहे।
दीपके ने दावा किया कि सौरभ दास और आशुतोष रांका को कई दिनों तक जेल में रखने का उद्देश्य प्रदर्शन करने वालों को डराना था, ताकि दूसरे लोग भी आंदोलन में शामिल होने से पहले सोचें। हालांकि, उनके अनुसार दोनों नेता जेल से लौटने के बाद पहले की तरह ही शांत और दृढ़ नजर आए। उन्होंने कहा कि सौरभ दास, जिनका पहले कोल्ड कॉफी पीने को लेकर मजाक उड़ाया जाता था, आठ दिन तिहाड़ जेल में रहने के बाद भी हंसते हुए बाहर आए। वहीं, आशुतोष रांका भी जेल से लौटने के बाद सामान्य और शांत दिखाई दिए तथा उन्होंने आगे की योजना के बारे में पूछा।
अभिजीत दीपके ने बताया कि जब उन्हें जमानत मिल गई थी, जबकि उनके साथी जेल में ही थे, तब उन्हें इस बात का बुरा लग रहा था। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी इच्छा थी कि उन्हें भी जेल में रखा जाता। दीपके के मुताबिक, अब संगठन के नेता दोबारा एकजुट होंगे, आपस में चर्चा करेंगे और नए तरीके से आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार सीजेपी से डरती है और इसी वजह से संगठन के प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि कई अन्य लोग भी प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सीजेपी के नेताओं को जिस तरह आठ दिनों तक जेल में रखा गया, वैसा दूसरे प्रदर्शनकारियों के साथ नहीं हुआ। दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार को आशंका है कि सीजेपी युवाओं को अपने साथ जोड़ रही है और इसी कारण संगठन को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर लगाए गए ये आरोप दीपके के अपने दावे हैं।
आंदोलन की रणनीति में बदलाव की जरूरत के सवाल पर दीपके ने कहा कि जब वह भारत आए थे, तभी उन्होंने तय कर लिया था कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उनका सामना किया जाएगा। लेकिन अब आंदोलन का दायरा बढऩे के कारण इसे अधिक सावधानी के साथ आगे ले जाना जरूरी हो गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन को अपनी मौजूदा रणनीति की समीक्षा करनी होगी और कई मुद्दों पर नए सिरे से विचार करना पड़ेगा। उनके अनुसार, आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी सहायता और बचाव की व्यवस्था भी पहले से अधिक मजबूत करनी होगी।
दीपके ने आशंका जताई कि आने वाले समय में संगठन और उसके सदस्यों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि दो-तीन महीने बाद गिरफ्तारियों और मुकदमों जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है और संगठन इसके लिए तैयार था। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी को फंसाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन ऐसी चुनौतियों का मतलब यह नहीं है कि संगठन चुप बैठ जाएगा या आंदोलन से पीछे हट जाएगा। दीपके ने दोहराया कि सीजेपी अपनी लड़ाई जारी रखेगी, हालांकि आगे की रणनीति साथियों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय की जाएगी।








