देश के एविएशन सेक्टर में एयरपोर्ट और एयरलाइन के एक ही कारोबारी समूह के स्वामित्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अदाणी समूह की एयरलाइन कारोबार में संभावित एंट्री से जुड़ी अटकलों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने साफ किया है कि सरकार ने अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। सरकार एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन में हिस्सेदारी रखने की अनुमति देने के फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है।
सरकार के सामने क्या है मुद्दा?
दरअसल, मौजूदा व्यवस्था में दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख एयरपोर्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट में एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस के बीच क्रॉस-ओनरशिप पर कुछ प्रतिबंध हैं। सरकार अब इस व्यवस्था की समीक्षा कर रही है कि क्या एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनियों को एयरलाइन कारोबार में उतरने या उसमें हिस्सेदारी लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।
मंत्री नायडू ने कहा कि सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य देश में ज्यादा एयरलाइंस लाना है, ताकि यात्रियों के पास यात्रा के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध हों। हालांकि, एयरपोर्ट और एयरलाइन के एक ही समूह के नियंत्रण में आने से जुड़े संभावित हितों के टकराव को भी ध्यान में रखना होगा।
अदाणी समूह का नाम क्यों आया?
इस पूरे मामले में अदाणी समूह का नाम इसलिए चर्चा में आया क्योंकि समूह देश के कई बड़े एयरपोर्ट का संचालन करता है। अगस्त में सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों की ओर से क्रॉस-होल्डिंग से जुड़ी संविदात्मक पाबंदियों में छूट के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) को एक अनुरोध मिला है। हालांकि, उस समय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा था कि इस अनुरोध की अभी जांच नहीं की गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स की ओर से जून में AAI को पत्र भेजकर कुछ प्रतिबंधों में छूट या स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसमें समूह को किसी निर्धारित एयरलाइन में निवेश करने, उसे स्थापित करने, खरीदने, प्रमोट करने या नियंत्रित करने की अनुमति से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
लेकिन अदाणी समूह ने एयरलाइन लॉन्च की खबरों से किया था इनकार
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जुलाई 2026 में अदाणी एंटरप्राइजेज ने उन मीडिया रिपोर्टों और बाजार में चल रही अटकलों का खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि समूह एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने कहा था कि वह एयरलाइन कारोबार में प्रवेश करने के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में इसे अदाणी समूह की एयरलाइन लॉन्च की अंतिम घोषणा के तौर पर नहीं देखा जा सकता। सरकार की तरफ से भी अभी एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
सरकार ज्यादा एयरलाइंस क्यों चाहती है?
नागरिक उड्डयन मंत्री के मुताबिक, देश में हवाई यात्रा की मांग बढ़ रही है और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ज्यादा एयरलाइंस की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले वर्षों में अपने एयरपोर्ट नेटवर्क का भी विस्तार करना होगा।
सरकार का मानना है कि ज्यादा एयरलाइंस होने से यात्रियों को विकल्प मिल सकते हैं। इसी संदर्भ में एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइन कारोबार में आने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले में संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी।
क्रॉस-ओनरशिप से जुड़ी चिंता क्या है?
एयरपोर्ट और एयरलाइन का स्वामित्व एक ही समूह के पास होने की स्थिति में प्रतिस्पर्धा को लेकर कुछ सवाल उठ सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, दूसरी एयरलाइंस के लिए एयरपोर्ट पर फ्लाइट स्लॉट, एयरपोर्ट शुल्क या ग्राउंड हैंडलिंग जैसी सुविधाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
इंडिगो के प्रमोटर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने जुलाई में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति देने के विचार का विरोध किया था और इसे संभावित हितों के टकराव से जोड़ा था।
हालांकि, सरकार का कहना है कि इस मुद्दे पर फायदे और नुकसान दोनों का अध्ययन किया जाएगा। यानी अंतिम नीति बनाते समय एक तरफ ज्यादा एयरलाइंस और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की जरूरत होगी, वहीं दूसरी तरफ सभी एयरलाइंस के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने का सवाल भी महत्वपूर्ण रहेगा।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल सरकार ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन कारोबार में उतरने की अनुमति देने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस विषय के अलग-अलग पहलुओं पर विचार कर रहा है। इसलिए अदाणी समूह की एयरलाइन एंट्री को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है।
आने वाले समय में सरकार की ओर से नियमों में किसी बदलाव, छूट या नई व्यवस्था को लेकर फैसला होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि एयरपोर्ट संचालक एयरलाइन कारोबार में किस सीमा तक प्रवेश कर सकेंगे। फिलहाल मामला क्रॉस-ओनरशिप नियमों की समीक्षा और सरकार के विचार-विमर्श के चरण में है।








