Explore

Search
Close this search box.

Search

April 19, 2024 8:18 am

Our Social Media:

लेटेस्ट न्यूज़

Delhi News: गिरफ्तारी के बाद रिमांड, जेल या बेल, सीएम अरविंद केजरीवाल के पास क्या है रास्ता

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

नई दिल्ली: दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल को 28 मार्च तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया है। ऐसे में सवाल है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद अब आगे क्या कानूनी रास्ता होगा? क्या जमानत के लिए अर्जी दाखिल हो सकती है? केजरीवाल की ओर से रिलीफ के लिए कौन सी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा? यह सब कानूनी सवाल हैं, जिन पर चर्चा जोरों से है।

जयपुर में अप्रूवड प्लॉट मात्र 7000/- प्रति वर्ग गज 9314188188
अधिकतम 14 दिन की रिमांड का प्रावधान

जहां तक रिमांड का सवाल है तो अधिकतम 14 दिन की रिमांड की मांग की जा सकती है। कानूनी जानकार और हाई कोर्ट के वकील नवीन शर्मा बताते हैं कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पहले 14 दिनों के दौरान जांच एजेंसी रिमांड के लिए अर्जी दाखिल कर सकती है और रिमांड के दौरान आरोपी से पूछताछ कर सकती है। कानूनी जानकार बताते हैं कि रिमांड पर बहस के दौरान सरकारी वकील को अदालत को इस बात से अवगत कराना होता है कि पूछताछ क्यों जरूरी है। आखिर क्या रिकवरी करनी है। साथ ही अदालत को बताना होता है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर छानबीन में क्या मदद मिलनी है। कोर्ट के पास अधिकार है कि जितने दिनों की रिमांड की मांग की जा रही है उतने दिन या उससे कम अवधि के लिए रिमांड पर भेज सकती है। अगर इस दौरान पूछताछ पूरी नहीं होती है तो फिर जांच एजेंसी दोबारा रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है।

Chandra Grahan 2024: 25 मार्च को ग्रहण कितने बजे से कितने बजे तक है ?

पूछताछ के बाद जेल में भेजने का प्रावधान

रिमांड पहली गिरफ्तारी के 14 दिनों के दौरान ही ली जा सकती है। अगर 14 दिनों के भीतर जांच एजेंसी को कोई नया तथ्य नहीं मिलता है तो फिर रिमांड नहीं मिलेगी, लेकिन पुलिस को पूछताछ करनी है तो कोर्ट की इजाजत से जेल में भी पूछताछ की जा सकती है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद आरोपी को जब तक जमानत न मिले, तब तक न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का प्रावधान है।अरेस्ट पर राजनीति गरमाई, दिल्ली शराब घोटाला मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी पर किसने क्या कहा?

कब लगाई जा सकती है जमानत की अर्जी

जांच एजेंसी द्वारा रिमांड लिए जाने के बाद जब आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है उसके बाद ही आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई होती है। यानी रिमांड के दौरान जमानत पर सुनवाई नहीं होती है बल्कि न्यायिक हिरासत की अवधि के दौरान जमानत पर सुनवाई होती है।

कब मिलती है डिफॉल्ट बेल

अगर तय समय में चार्जशीट दाखिल न हो तो आरोपी को जमानत दिए जाने का प्रावधान है। यानी सीआरपीसी की धारा-167 (2) के तहत 10 साल तक की सजा के मामले में गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है और इस दौरान अगर चार्जशीट नहीं होती तो आरोपी को जमानत मिल जाती है। जबकि 10 साल से उम्रकैद व फांसी के मामले में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करने पर आरोपी को जमानत मिल जाती है। कानूनी जानकार और सीनियर एडवोकेट रमेश गुप्ता बताते हैं कि चाहे मामला बेहद गंभीर ही क्यों न हो, लेकिन समय पर अगर पुलिस चार्जशीट दाखिल न करे, तब भी आरोपी को जमानत दी जा सकती है। मसलन ऐसा मामला जिसमें 10 साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान हो वैसे मामले में अगर गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना जरूरी है। अगर इस दौरान चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती है तो आरोपी को जमानत दिए जाने का प्रावधान है।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Comment

Digitalconvey.com digitalgriot.com buzzopen.com buzz4ai.com marketmystique.com

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर