मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर चीन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह इस मामले में दखल देने से बचे। चीन के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
चीन के अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह का टकराव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बाहरी हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ सकती है। चीन ने अमेरिका को सलाह दी है कि वह क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए संयम बरते और किसी भी तरह की सैन्य या राजनीतिक दखलअंदाजी से दूर रहे।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का परिवहन होता है। यदि यहां नाकेबंदी या तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर दुनिया की नजर रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह रुख उसके आर्थिक हितों से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि वह ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं, अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखना चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी चिंता जताई है कि यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
फिलहाल, होर्मुज को लेकर चीन और अमेरिका के बीच बयानबाजी ने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं कि आगे हालात किस दिशा में जाते हैं।







