लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश में पोस्टर की राजनीति तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक कोई औपचारिक सहमति सामने नहीं आई है, लेकिन इसी बीच ‘200 सीट हक हमारा’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग कई जिलों में दिखाई देने लगे हैं। इन पोस्टरों पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीरें लगी हुई हैं। पोस्टर किसने लगवाए हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए पोस्टरों को फर्जी बताया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाने की अनुमति किसने दी और संबंधित अधिकारी इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा कि गठबंधन से भाजपा के पेट में दर्द हो रहा है और इसी डर के कारण नकली पोस्टर लगाए जा रहे हैं। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई अंतिम समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है।
पोस्टर लगाने के मामले में नगर निगम अधिकारियों पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने केवल पोस्टरों की प्रामाणिकता पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर लगाने की प्रक्रिया को लेकर भी प्रशासन को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना निर्धारित शुल्क जमा किए सार्वजनिक जगहों पर होर्डिंग और पोस्टर लगाए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। अखिलेश यादव ने इस स्थिति के पीछे भ्रष्टाचार या शासन के दबाव की आशंका भी जताई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में पीडीए सरकार बनने पर ऐसे मामलों का हिसाब लिया जाएगा। उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) जैसी एजेंसियों को सक्रिय करने की बात भी कही। अखिलेश के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और प्रदेश सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
अमेठी और सुल्तानपुर समेत कई जिलों में दिखे पोस्टर
जानकारी के मुताबिक, अमेठी और सुल्तानपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों में ‘200 सीटें हक है हमारा’ लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। इन पर कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की तस्वीरें मौजूद हैं, लेकिन पोस्टरों पर इन्हें जारी करने वाले व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिखा गया है। इसी वजह से इनके पीछे किसका हाथ है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सीटों के बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी पहले भी सार्वजनिक बयानबाजी पर आपत्ति जता चुकी है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं की तस्वीरों वाले इन पोस्टरों ने दोनों दलों के बीच संभावित चुनावी तालमेल को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पोस्टर सामने आने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है।
कांग्रेस ने पोस्टरों को आधिकारिक मानने से किया इनकार
कांग्रेस की प्रवक्ता और मीडिया विभाग की उपाध्यक्ष प्रियंका गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ‘200 सीट हक हमारा’ लिखे पोस्टर पार्टी के अधिकृत बैनर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से इन पोस्टरों को आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में ऐसे कार्यकर्ता मौजूद हैं, जो चाहते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे।
प्रियंका गुप्ता के मुताबिक, कांग्रेस प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपनी तैयारियां कर रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी जहां से भी चुनाव लड़ेगी, उसकी लड़ाई भाजपा और उसकी नीतियों के खिलाफ होगी। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने पोस्टरों को आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है, लेकिन पार्टी के चुनावी अभियान और सीटों पर तैयारी को लेकर अपनी सक्रियता बनाए रखने की बात कही है।
2027 के चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति पर नजर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन, सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। ‘200 सीट हक हमारा’ पोस्टरों के सामने आने के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिली है। एक ओर अखिलेश यादव ने पोस्टरों को फर्जी बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का आधिकारिक प्रचार अभियान मानने से इनकार किया है।
फिलहाल, इन पोस्टरों को किसने लगवाया और क्या इनके पीछे किसी राजनीतिक संगठन या कार्यकर्ता की भूमिका है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सपा और कांग्रेस के नेताओं की ओर से सीटों के बंटवारे तथा चुनावी तालमेल को लेकर दिए जाने वाले बयान महत्वपूर्ण होंगे। विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टरों के जरिए शुरू हुई यह सियासी बहस प्रदेश की राजनीति में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर जारी अनिश्चितता को भी उजागर करती है।








