भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिहाज से शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में होने वाली इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापार और डिजिटल तकनीक जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रतिनिधित्व को लेकर भी ध्यान केंद्रित है। इस बैठक के जरिए भारत क्षेत्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने और सदस्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर जोर दे सकता है।
SCO एशिया का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक विकास और सदस्य देशों के बीच सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहते हैं। बदलते वैश्विक हालात में इस मंच की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत के लिए यह बैठक अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने, सहयोग के नए अवसर तलाशने और क्षेत्रीय चुनौतियों पर अन्य देशों के साथ चर्चा करने का अवसर हो सकती है।
SCO समिट में भारत की बड़ी तैयारी, दुशांबे में राजनाथ सिंह करेंगे देश की अगुवाई; डिजिटल ताकत और व्यापार पर रहेगा फोकस
दुशांबे: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक 19 और 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित होगी। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश, परिवहन, कनेक्टिविटी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर रहेगा।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाने की जरूरत लगातार बढ़ रही है। भारत के लिए यह मंच मध्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का अवसर है।
19-20 अक्टूबर को दुशांबे में जुटेंगे सदस्य देशों के प्रतिनिधि
SCO की शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना है। इसमें व्यापार और निवेश से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक सहयोग तथा वित्तीय संपर्क जैसे विषयों पर विचार किया जाएगा।
बैठक में सदस्य देशों के बीच पहले से चल रही सहयोग पहलों की प्रगति की समीक्षा और संगठन के कामकाज से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। ताजिकिस्तान इस बैठक की मेजबानी कर रहा है।
व्यापार और निवेश पर रहेगा खास फोकस
इस बैठक का एक प्रमुख एजेंडा SCO सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाना और निवेश के नए अवसर तलाशना है। क्षेत्रीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए व्यापारिक प्रक्रियाओं को आसान बनाना, परिवहन लागत कम करना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के लिए मध्य एशिया ऊर्जा, खनिज संसाधनों, बाजारों और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी के लिहाज से अहम है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच के जरिए भारत विभिन्न सदस्य देशों के साथ आर्थिक सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा कर सकता है।
हालांकि, व्यापार बढ़ाने के प्रयासों के सामने भौगोलिक दूरी, परिवहन मार्गों की सीमाएं और अलग-अलग देशों की नीतियों जैसी चुनौतियां भी हैं। ऐसे में बेहतर कनेक्टिविटी और व्यावहारिक सहयोग पर सहमति बनाना महत्वपूर्ण होगा।
डिजिटल अर्थव्यवस्था और नई तकनीक पर भी चर्चा
SCO के आर्थिक एजेंडे में डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवाचार और वित्तीय सहयोग को भी महत्व दिया जा रहा है। डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कारोबार को आसान बनाने, सेवाओं को बेहतर करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत करने में मदद कर सकता है।
डिजिटल सेवाओं, स्टार्टअप, तकनीकी नवाचार और ऑनलाइन व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षेत्र के अनुभव के आधार पर इन विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है। हालांकि, बैठक में किसी विशेष समझौते या नई पहल की घोषणा होने की पुष्टि अभी अलग से जरूरी होगी।
भारत और ताजिकिस्तान के संबंधों पर भी नजर
राजनाथ सिंह की यात्रा के दौरान भारत और ताजिकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के लिए बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
मध्य एशिया के साथ भारत के संबंध रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। क्षेत्रीय स्थिरता, व्यापार, संपर्क मार्ग और आपसी सहयोग ऐसे विषय हैं, जिन पर भारत लगातार जोर देता रहा है।
SCO में भारत के लिए क्यों अहम है यह बैठक?
SCO भारत को चीन, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों के साथ एक साझा बहुपक्षीय मंच पर बातचीत का अवसर देता है। सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद आर्थिक सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और साझा चुनौतियों पर संवाद जारी रखना इस संगठन की अहम भूमिका है।
भारत के लिए जरूरी होगा कि वह व्यापार और निवेश के अवसरों के साथ अपनी सुरक्षा, आर्थिक हितों और क्षेत्रीय संपर्क से जुड़ी प्राथमिकताओं को भी सामने रखे। बैठक में होने वाली चर्चा से यह संकेत मिल सकता है कि सदस्य देश आर्थिक और डिजिटल सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए किस तरह के व्यावहारिक कदम उठाने को तैयार हैं।
अब सबकी नजरें 19 और 20 अक्टूबर को दुशांबे में होने वाली बैठक पर रहेंगी। व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर होने वाली चर्चा के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सदस्य देश बातचीत को ठोस सहयोग और लागू की जा सकने वाली पहलों में कितना बदल पाते हैं।








