शेयर बाजार में मंगलवार को शुगर स्टॉक्स पर अचानक भारी दबाव देखने को मिला। बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान शुगर, श्री रेणुका शुगर समेत कई कंपनियों के शेयर 3 से 6 फीसदी तक लुढ़क गए। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार का एक नया नोटिफिकेशन बना, जिसमें कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
क्या है सरकार का नया फैसला?
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 20 अगस्त को जारी किए गए पब्लिक नोटिस में संशोधन किया है। सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। पहले नियम यह था कि आयातकों को कच्ची चीनी को रिफाइन करके 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य था।
अब इस फिक्स डेडलाइन को हटा दिया गया है। नए नियम के मुताबिक आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से पूरे दो महीने का समय मिलेगा। यानी अब वे अपनी सुविधानुसार कच्ची चीनी को प्रोसेस करके घरेलू बाजार में बेच सकेंगे। इसके अलावा मौजूदा एडवांस ऑथराइजेशन को भी TRQ योजना में बदलने की अनुमति दी गई है।
बाजार में क्यों मची तबाही?
इस फैसले के बाद निवेशकों को घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की आशंका सताने लगी। पिछले कुछ हफ्तों में शुगर स्टॉक्स में अच्छी तेजी देखी गई थी क्योंकि घरेलू स्टॉक कम होने और कीमतों में उछाल की वजह से कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद थी। लेकिन आयात नियमों में राहत मिलते ही मुनाफावसूली शुरू हो गई।
बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर करीब 3.5 फीसदी टूटे। बजाज हिंदुस्तान शुगर में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। श्री रेणुका शुगर और दलमिया भारत शुगर के शेयर भी दबाव में रहे। पूरे शुगर सेक्टर में बिकवाली का माहौल बना रहा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर काबू पाना है। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। घरेलू स्टॉक भी सामान्य स्तर से कम होने का अनुमान है। ऐसे में ड्यूटी-फ्री आयात को और आसान बनाकर सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी सख्त की है। सितंबर से नवंबर तक थोक खरीदार केवल 15 दिन की खपत के बराबर ही स्टॉक रख सकेंगे।
आगे क्या होगा?
विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में शुगर स्टॉक्स पर दबाव बना रह सकता है क्योंकि आयात बढ़ने से घरेलू कीमतों में नरमी आने की संभावना है। हालांकि लंबे समय में कंपनियों की स्थिति उत्पादन, एथेनॉल नीति और गन्ने की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
सरकार के इस एक नोटिफिकेशन ने शुगर सेक्टर का पूरा मूड बदल दिया है। जो शेयर पिछले दिनों तेजी के मूड में थे, वे अब बिकवाली का सामना कर रहे हैं। निवेशकों को अब आगे के नीतिगत फैसलों और घरेलू सप्लाई की स्थिति पर नजर रखनी होगी।








