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April 25, 2026 1:55 pm

राष्ट्रपति भवन में महका राजस्थानी तड़का,साउथ कोरिया के राष्ट्रपति को परोसा राजस्थान का स्वाद ‘गुलाब बाटी चूरमा’

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जयपुर। राष्ट्रपति भवन में सोमवार शाम आयोजित विशेष डिनर में राजस्थानी ज़ायक़े के ज़रिए राजस्थान के राजसी सांस्कृति की छटा दिखाई गई। भारत आए मेहमान साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के सम्मान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भव्य राजकीय भोज की मेजबानी की। इस भोज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राष्ट्रीय मंत्री की उपस्थिति ने शाम को गरिमाई किया।

इस खास डिनर का मुख्य उद्देश्य था मेहमानों को राजस्थान के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक और स्वादिष्ट खाने से रूबरू करना। इस खास मेन्यू को तैयार करने का काम राजस्थान के जाने-माने शेफ डॉ सौरभ शर्मा और उनकी टीम ने किया।


राजस्थानी खान का आनंद लेते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने शेफ और उनकी टीम की प्रसंशा करते हुए कहा कि “ये एक शानदार राजस्थानी भोजन का अनुभव था”, वहीं प्रेजिडेंट सेक्रेट्री दीप्ति उमाशंकर ने डॉ. शेफ सौरभ और उनकी टीम को इस प्रतिष्ठित आयोजन में राजस्थानी पाक विरासत का प्रतिनिधित्व करने की उपलब्धि पर बधाई दी। साथ ही प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य के लिए अपनी शुभकामाएं दी। वहीं शशि थरूर ने कहा कि राजस्थानी भोजन शाकाहारी होने के साथ ही स्वादिष्ट था।

खाने में और क्या क्या खास –

शेफ सौरभ और उनकी टीम शेफ़ रविंद्र नरुक़ा, शेफ़ हिम्मत सिंह, शेफ़ रतिराम प्रजापत और राष्ट्रपति भवन के एग्जीक्यूटिव शेफ़ मुकेश कुमार ने मिलकर रॉयल थालियों में राजस्थान प्रस्तुत किया। जहां उन्होंने जैसलमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, जयपुर सहित रॉयल फैमिली के पारम्परिक व्यजनों को आधुनिक रूप से परोसा। इस ख़ास मेन्यू में सभी डिशों ने मेहमानों का ध्यान खींचा। जिसमें खास कर ज्वार का राब से लेकर गोविंद गट्टा, धुंगारी पालक मंगोड़ी, चांदी वाली दाल, जैसलमेरी पुलाव और गुलाब बाटी-चूरमा जैसे व्यंजनों ने मेहमानों को राजस्थान की विविधता से रूबरू कराया। वहीं खीरंद मालपुआ और घेवर जैसी मिठाइयों ने पारंपरिक मिठास का अनुभव कराया। खास बात यह रही कि इन व्यंजनों को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत करते हुए भी उनकी मौलिकता और परंपरा को पूरी तरह संजोया गया।

डेढ़ महीने तक की एक-एक डिश पर तैयारी –

अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां डॉ उमा शर्मा और पत्नी डॉ नेहा शर्मा को देते हुए शेफ सौरभ ने बताया कि मेरे परिवार का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण था। इस विशेष मेन्यू को अंतिम रूप देने से पहले लगभग डेढ़ महीने तक गहन शोध किया और अनेक बार ट्रायल किए। उन्होंने राजस्थान की पारंपरिक रसोई, स्थानीय सामग्री और प्राचीन पाक विधियों का गहराई से अध्ययन किया, ताकि हर व्यंजन न केवल स्वाद में उत्कृष्ट हो, बल्कि उसकी प्रस्तुति में भी राजस्थान की असली पहचान झलके। इस दौरान कई बार अलग-अलग संयोजन और तकनीकों पर प्रयोग किए गए, जिसके बाद प्रत्येक डिश को सावधानीपूर्वक चयनित कर अंतिम मेन्यू में शामिल किया गया, ताकि यह राजकीय भोज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक यादगार अनुभव बन सके।

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