नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट और मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से जुड़े विवाद के बीच बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा अदालत का अपमान करने का नहीं था। यह मामला न्यायपालिका से जुड़ी टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लेकर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाए जाने के बाद संजय राउत का माफीनामा सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, संजय राउत ने अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था। इस पोस्ट के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। उनके बयान को लेकर बीजेपी समेत कई नेताओं ने आपत्ति जताई और इसे न्यायपालिका के प्रति अनुचित रवैया बताया।
20 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, राउत के पोस्ट को लेकर बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि वह भारत में भी अराजकता जैसी स्थिति का संकेत दे रहे हैं। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया था अवमानना नोटिस
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले को अवमानना से जुड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की ओर से दायर याचिका के बाद हुई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने न्यायपालिका के सम्मान और उसकी स्वतंत्रता को लेकर गंभीर रुख दिखाया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को डराने या दबाव में लाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
इसके बाद 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत को 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। पत्रकार निखिल वागले को भी उसी दिन वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित होने को कहा गया था।
संजय राउत ने क्या कहा?
इससे पहले संजय राउत ने कहा था कि उनका या उनकी पार्टी का सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर अदालत को उनकी किसी टिप्पणी पर आपत्ति है, तो वह माफी मांगने के लिए तैयार हैं।
राउत ने न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताते हुए अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट देश के संविधान की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है और उसके सामने अपनी बात रखने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
राजनीतिक विवाद के बीच अब आगे क्या होगा?
संजय राउत से जुड़े इस मामले में अब 17 नवंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में उनके बयान और सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार किया जा सकता है। अवमानना मामले में अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक बयानबाजी और न्यायपालिका के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।







