तेहरान। मध्य पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल Iran एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट को लेकर विवादों में घिर गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान हर दिन समुद्र में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल बहा रहा है, जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 2800 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, तेहरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए रिपोर्ट को “भ्रामक और तथ्यों से परे” बताया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में बहस तेज हो गई है। दावा किया गया कि तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़ी तकनीकी समस्याओं, स्टोरेज की कमी और प्रतिबंधों के कारण ईरान को अतिरिक्त तेल समुद्र में छोड़ना पड़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इससे समुद्री पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इतनी बड़ी मात्रा में तेल समुद्र में छोड़ा जाता है तो इसका असर समुद्री जीवों, मछली उद्योग और तटीय पर्यावरण पर लंबे समय तक पड़ सकता है। तेल रिसाव से समुद्र के पानी में प्रदूषण बढ़ता है और कई समुद्री प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है।
हालांकि, ईरानी सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के तेल मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि देश के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तेल उत्पादन और निर्यात प्रक्रिया का पालन करता है और समुद्र में तेल बहाने जैसी कोई स्थिति नहीं है।
तेहरान ने यह भी कहा कि कुछ विदेशी मीडिया संस्थान और संगठन राजनीतिक कारणों से ईरान की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, देश की तेल संरचना और निर्यात प्रणाली पूरी तरह नियंत्रित है तथा पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
ऊर्जा मामलों के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक बाजार में दबाव के कारण ईरान के तेल उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से ईरान के लिए तेल निर्यात और भंडारण दोनों जटिल बने हुए हैं। इसी कारण ऐसी रिपोर्टों को लेकर अटकलें बढ़ रही हैं।
वहीं, पर्यावरण संगठनों ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह समुद्री पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। कुछ संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से हस्तक्षेप कर सच्चाई सामने लाने की अपील भी की है।
इस पूरे विवाद के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजरें अब ईरान पर टिकी हुई हैं। तेल उत्पादन और निर्यात को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति, पर्यावरण सुरक्षा और ऊर्जा संकट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।








