नई दिल्ली। बहुचर्चित और अरबों रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले में भारतीय जांच एजेंसियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के कुछ ही दिनों भीतर, ऐप के सह-प्रवर्तक (को-प्रमोटर) रवि उप्पल को भी दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। भारतीय जांच एजेंसियों को अनौपचारिक सूत्रों के माध्यम से उप्पल की गिरफ्तारी की सूचना प्राप्त हो चुकी है, हालांकि यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के अधिकारियों द्वारा अभी तक आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि भारत सरकार से नहीं की गई है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब रवि उप्पल को भारत वापस लाने (प्रत्यर्पण) के लिए कानूनी प्रक्रिया में जुट गए हैं ताकि मामले में आगे की पूछताछ और गहन तफ्तीश की जा सके। यदि आधिकारिक पुष्टि हो जाती है, तो यह बहु-करोड़पति अवैध ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच में एक मील का पत्थर साबित होगा। उल्लेखनीय है कि रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर ने मिलकर ‘महादेव ऑनलाइन बुक’ सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म को खड़ा किया था और वे दुबई में बैठकर इस पूरे अवैध सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे। ये दोनों आरोपी वर्ष 2019 में ही भारत छोड़कर भाग गए थे और जांच एजेंसियों की चार्जशीट में मुख्य आरोपियों के रूप में नामित हैं।
इससे पहले रवि उप्पल को दिसंबर 2023 में भी इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत पर छोड़ दिया गया था। उसके बाद से उप्पल के ठिकाने के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं थी, और उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस को यह कहते हुए चुनौती भी दी थी कि उसके खिलाफ मामले राजनीति से प्रेरित हैं। प्रवर्तन निदेशालय इस बेटिंग सिंडिकेट के वित्तीय तंत्र, फर्जी बैंक खातों के नेटवर्क, हवाला ऑपरेटरों और विदेशी संस्थाओं के माध्यम से काले धन को सफेद करने के आरोपों की गहन जांच कर रहा है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, महादेव ऐप भारत भर में फ्रेंचाइजी-आधारित सट्टेबाजी पैनलों और शाखाओं के माध्यम से काम करता था। इन पैनलों के जरिए यूजर्स से सट्टे की राशि एकत्र की जाती थी और फिर हवाला चैनलों के जरिए फंड को विदेश भेजा जाता था। हाल ही में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित किया गया है, जो सीबीआई और ईडी के कई मामलों में वांछित है। अब चंद्राकर के भारत में होने और उप्पल के गिरफ्तार होने से जांच एजेंसियां सिंडिकेट के वित्तीय तंत्र और इसके सहयोगियों का पर्दाफाश करने के लिए अपनी जांच और तेज करने जा रही हैं।








