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November 4, 2026 5:05 pm

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ट्रंप की चुनावी हार के बाद सोने-चांदी में जबरदस्त उछाल, सोना 3,088 रुपये और चांदी 6,902 रुपये तक महंगी

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नई दिल्ली। लगातार कई दिनों तक गिरावट और दबाव का सामना करने के बाद बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों, डॉलर की कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया। इसके चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं की खरीदारी बढ़ गई। भारतीय वायदा बाजार में सोने और चांदी दोनों के भाव में कुछ ही समय के भीतर बड़ी बढ़त देखने को मिली।

घरेलू कमोडिटी बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना एक कारोबारी सत्र में 2.21 प्रतिशत यानी 3,088 रुपये की तेजी के साथ 1,42,540 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी में इससे भी अधिक उछाल दर्ज किया गया। चांदी का भाव 3.84 प्रतिशत यानी 6,902 रुपये बढ़कर 1,86,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान खबर लिखे जाने तक सोना 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं, दिसंबर वायदा चांदी 3.71 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,86,373 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई थी।

अमेरिकी चुनावी नतीजों से बदला बाजार का रुख

बाजार में आई इस तेजी के पीछे अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद निवेशकों ने अपने निवेश को लेकर रणनीति में बदलाव किया और सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बढ़त मिलने के बाद अमेरिकी राजनीति और आर्थिक नीतियों को लेकर नई संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी नरमी देखने को मिली। इन दोनों परिस्थितियों का सीधा फायदा सोने जैसी कीमती धातुओं को मिला। सामान्य तौर पर जब डॉलर कमजोर होता है और बॉन्ड से मिलने वाला प्रतिफल घटता है, तब निवेशकों के लिए सोना अधिक आकर्षक विकल्प बन जाता है। इसकी वजह यह है कि सोने पर ब्याज नहीं मिलता, लेकिन अनिश्चित आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में इसे सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है।

डॉलर की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे वैश्विक वित्तीय बाजारों में हो रहे बदलावों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉलर में कमजोरी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोने की खरीद अपेक्षाकृत आसान हो जाती है। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से निवेशकों का रुझान ऐसी संपत्तियों की ओर बढ़ता है, जिनमें आर्थिक अनिश्चितता के दौरान पूंजी सुरक्षित रखने की संभावना मानी जाती है।

इसके अलावा, पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई बढ़ने की आशंकाओं में कुछ कमी आई है। इससे निवेशकों को उम्मीद है कि दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों को आने वाले समय में ब्याज दरों और मौद्रिक नीतियों को लेकर अधिक लचीलापन दिखाने का अवसर मिल सकता है। ऐसे आर्थिक माहौल में सोने की मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की संभावना रहती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की चमक बढ़ी

भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना 2.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,031.90 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी की कीमतों में 4.10 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया और इसका भाव बढ़कर 51.795 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई इस तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की ओर से कीमती धातुओं की मांग बढ़ने और डॉलर में कमजोरी के कारण घरेलू वायदा बाजार में भी खरीदारी को प्रोत्साहन मिला। बाजार की मौजूदा गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि निवेशक फिलहाल आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अपने निवेश को सुरक्षित रखने के विकल्प तलाश रहे हैं।

रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर

वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। रूस की ओर से यूक्रेन और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय शांति वार्ता के लिए सहमति जताए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावनाएं बनी हैं। दूसरी ओर, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को लेकर अभी भी अनिश्चितता बरकरार है।

इन घटनाक्रमों के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम को लेकर सतर्कता बनी हुई है। आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध, राजनीतिक तनाव या कूटनीतिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक शेयर बाजार और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों से पैसा निकालकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में लगाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि मौजूदा परिस्थितियों में सोने की मांग को समर्थन मिल रहा है।

सोने के लिए 1.43 लाख रुपये के आसपास अहम स्तर

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर एमसीएक्स पर सोने की कीमतों के लिए 1,41,000 रुपये के आसपास पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर बताया जा रहा है। इसके बाद 1,43,000 रुपये से 1,43,700 रुपये के बीच अगला प्रमुख रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है। यदि कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो बाजार की नजर इन स्तरों पर बनी रहेगी।

वहीं, गिरावट की स्थिति में सोने के लिए 1,40,000 रुपये का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में महत्वपूर्ण है। इसके नीचे 1,37,500 रुपये से 1,38,300 रुपये के बीच अगला सपोर्ट जोन माना जा रहा है। तकनीकी स्तरों के आधार पर आने वाले कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

हालांकि, कीमतों में जोरदार रिकवरी के बावजूद तकनीकी संकेतक अभी पूरी तरह मजबूत स्थिति में नहीं पहुंचे हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) करीब 35 के स्तर पर बना हुआ है, जबकि मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (एमएसीडी) का हिस्टोग्राम अब भी नकारात्मक क्षेत्र में है और इसकी कमजोरी लगातार दिखाई दे रही है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, इन संकेतकों से फिलहाल कीमतों के रुझान में मजबूत सुधार की पुष्टि नहीं होती है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की आगे की चाल पर नजर रखने की जरूरत होगी।

चांदी के लिए 1.88 लाख रुपये का स्तर महत्वपूर्ण

चांदी की कीमतों में आई तेज बढ़त के बाद अब इसके अगले महत्वपूर्ण स्तरों पर बाजार की नजर बनी हुई है। तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, एमसीएक्स पर चांदी के लिए 1,86,000 रुपये से 1,88,000 रुपये के बीच तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। यदि चांदी इस स्तर से ऊपर टिकने में सफल रहती है, तो कीमतों के लिए 1,94,000 रुपये से 1,96,000 रुपये के अगले रेजिस्टेंस जोन की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।

दूसरी ओर, गिरावट आने की स्थिति में चांदी के लिए 1,78,000 रुपये से 1,80,000 रुपये का स्तर तत्काल सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। इसके बाद 1,70,000 रुपये से 1,72,000 रुपये के बीच अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इन स्तरों पर चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।

फेडरल रिजर्व की नीति तय करेगी आगे की दिशा

आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति की अहम भूमिका रहने वाली है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित करेंगे। यदि डॉलर में कमजोरी बनी रहती है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट जारी रहती है, तो सोने को आगे भी समर्थन मिल सकता है।

हालांकि, तकनीकी संकेतकों में कमजोरी और वैश्विक बाजारों में संभावित उतार-चढ़ाव को देखते हुए कीमतों में अस्थिरता से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल अमेरिकी चुनावी नतीजों के बाद पैदा हुई परिस्थितियों ने सोने और चांदी को मजबूती दी है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के रुख, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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