राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता और अखंडता में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दुनिया के कई राजनीतिक जानकारों को लगता था कि भारत लंबे समय तक एकजुट नहीं रह पाएगा, लेकिन सरदार पटेल ने महज 1,218 दिनों में वह कर दिखाया, जिसे पूरी दुनिया असंभव मानती थी। शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता से रियासतों में बंटे भारत को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक काम किया।
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर दी श्रद्धांजलि
दरअसल, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर दिल्ली में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
इस दौरान अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का योगदान केवल देश की रियासतों को एकजुट करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने आधुनिक भारत के राजनीतिक और भौगोलिक स्वरूप को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जिस एकजुट भारत की कल्पना की थी, वह आज पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ खड़ा है।
1,218 दिनों में एकजुट भारत का निर्माण
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत को आजादी मिली थी, उस समय दुनिया के कई राजनीतिक विशेषज्ञों को आशंका थी कि इतनी विविधता और सैकड़ों रियासतों वाला देश एक साथ नहीं रह पाएगा। उन्हें लगता था कि भारत का बिखरना तय है। लेकिन सरदार पटेल ने इन तमाम आशंकाओं को गलत साबित कर दिया।
शाह के मुताबिक, आजादी के बाद महज 1,218 दिनों में सरदार पटेल ने देश को एकजुट करने का ऐसा काम किया, जिसे कई नेता मिलकर भी शायद अपनी पूरी जिंदगी में पूरा नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने अलग-अलग रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर एक मजबूत और एकीकृत भारत की नींव रखी।
‘अखंड भारत के निर्माण के शिल्पकार थे सरदार पटेल’
गृह मंत्री ने सरदार पटेल को अखंड भारत के निर्माण का शिल्पकार बताते हुए कहा कि उन्होंने देश के इतिहास के साथ-साथ उसके भौगोलिक स्वरूप को भी नई दिशा दी। शाह ने कहा कि सरदार पटेल ने अनेक रियासतों को एक माला के मोतियों की तरह जोड़कर भारत को एक राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल का योगदान राजनीतिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक एकीकरण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनकी दूरदर्शिता और मजबूत नेतृत्व ने देश की एकता को मजबूत आधार दिया।
कांग्रेस पर भी अमित शाह ने साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सरदार पटेल को उनके योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं दिया गया। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने सरदार पटेल की स्मृतियों को भुलाने की कोशिश की, लेकिन किसी महान व्यक्तित्व के योगदान को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की विरासत को देशभर में स्थापित करने का प्रयास किया। इसी दिशा में गुजरात में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कराया गया, जो आज सरदार पटेल के योगदान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन चुका है।
‘रन फॉर यूनिटी’ का भी हुआ आयोजन
राष्ट्रीय एकता दिवस के मौके पर दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। अमित शाह ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और एकता दौड़ को रवाना किया। इस आयोजन का उद्देश्य देश के लोगों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और आपसी सद्भाव का संदेश देना है।
अमित शाह ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती पर देशवासियों को राष्ट्रीय एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए।
कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी किया याद
सरदार पटेल की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार पटेल के जीवन को राष्ट्रसेवा और एकता की प्रेरणा बताया। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने असम को भारत का हिस्सा बनाए रखने में उनकी भूमिका को याद किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
इस तरह राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर देशभर में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए सरदार वल्लभभाई पटेल के ऐतिहासिक योगदान, उनकी दूरदर्शिता और देश को एकजुट करने के प्रयासों को याद किया गया।







