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October 28, 2026 4:52 pm

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अमेठी में सरकारी लापरवाही की हद! पैर से दिव्यांग बुजुर्ग को थमा दिया आंखों की कमजोरी वाला कार्ड, 5 साल से परेशान

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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में दिव्यांगता प्रमाणपत्र से जुड़ी एक गंभीर समस्या सामने आई है। यहां पैर से दिव्यांग बुजुर्ग विनोद कुमार द्विवेदी के यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड में उनकी वास्तविक दिव्यांगता के बजाय आंखों से कम दिखाई देने यानी ‘लो-विजन’ की श्रेणी दर्ज हो गई। बुजुर्ग का कहना है कि इस गलती को ठीक कराने के लिए वह पिछले करीब पांच साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

यह मामला अमेठी के जामो थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। विनोद कुमार द्विवेदी के मुताबिक, वह पैरों से दिव्यांग हैं और उन्हें चलने-फिरने में सहायता के लिए उपयुक्त उपकरणों की जरूरत है। लेकिन उनके दिव्यांगता कार्ड में आंखों की कमजोरी दर्ज होने के कारण उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक सुविधाएं हासिल करने में परेशानी हो रही है। उनका आरोप है कि प्रमाणपत्र में गलत श्रेणी दर्ज होने से उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

ट्राईसाइकिल की जरूरत, लेकिन मिल रही दूसरी श्रेणी की सहायता

रिपोर्ट के अनुसार, विनोद कुमार को चलने-फिरने में मदद के लिए ट्राईसाइकिल जैसे सहायक उपकरण की आवश्यकता है। उनके पड़ोसी देव नारायण ने भी बताया कि विनोद बचपन से पैर से दिव्यांग हैं, लेकिन उनके कार्ड में आंखों से जुड़ी दिव्यांगता दर्ज है। पड़ोसी का दावा है कि इसी वजह से उन्हें जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं और आंखों से संबंधित समस्या में इस्तेमाल होने वाली छड़ी दे दी जाती है।

इस तरह दस्तावेज में दर्ज एक गलत श्रेणी बुजुर्ग के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। दिव्यांगता प्रमाणपत्र केवल पहचान का दस्तावेज नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में प्रमाणपत्र में सही जानकारी दर्ज होना बेहद जरूरी है।

पांच साल से सुधार की कोशिश, अब मीडिया के जरिए उठाई आवाज

विनोद कुमार द्विवेदी का कहना है कि वह पिछले पांच वर्षों से अपने दिव्यांगता प्रमाणपत्र में सुधार कराने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान वह संबंधित अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक सही श्रेणी वाला कार्ड नहीं मिल पाया। लगातार परेशानी झेलने के बाद उन्होंने मीडिया के माध्यम से अपनी समस्या सामने रखी है।

बुजुर्ग चाहते हैं कि उनके मामले की जांच की जाए और दस्तावेज में उनकी वास्तविक दिव्यांगता के अनुसार सुधार किया जाए। इससे उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक सरकारी सहायता और सुविधाएं प्राप्त करने में मदद मिल सकेगी।

CMO ने पोर्टल की तकनीकी समस्या को बताया वजह

मामले पर अमेठी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि UDID पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पोर्टल से संबंधित समस्याओं को दूर करने का काम चल रहा है। सीएमओ के मुताबिक, विनोद कुमार द्विवेदी का मामला उस समय तक उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया।

क्या है UDID कार्ड और क्यों जरूरी है सही जानकारी?

UDID यानी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान और दिव्यांगता प्रमाणपत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों की जानकारी दर्ज की जाती है और पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दिव्यांगता प्रमाणन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

यदि कार्ड में दिव्यांगता की श्रेणी ही गलत दर्ज हो जाए, तो संबंधित व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुरूप सहायता प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है। विनोद कुमार द्विवेदी का मामला इसी समस्या को सामने लाता है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग उनके दस्तावेज में सुधार कराकर उन्हें राहत कब तक उपलब्ध कराता है।

फिलहाल, पांच साल से परेशानी झेल रहे बुजुर्ग को सही दिव्यांगता प्रमाणपत्र मिलने और उनकी समस्या के समाधान का इंतजार है। इस मामले ने दिव्यांगजनों के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी की शुद्धता और शिकायतों के समय पर निस्तारण की जरूरत को फिर से उजागर किया है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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