नई दिल्ली। मुंबई के जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की घटना के तीन दिन के भीतर पुलिस ने कुल सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन शूटर और चार ऐसे लोग शामिल हैं जो मुंबई तक हथियार और गोला-बारूद पहुँचाने वाले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा थे।
हमला कैसे हुआ था?
18 अक्टूबर को अभिनेता टाइगर श्रॉफ मुंबई के जुहू स्थित एक फुटबॉल ग्राउंड से अपने घर लौट रहे थे, तभी परिसर से बाहर निकलते ही उनकी कार पर नजदीक से तीन राउंड फायरिंग की गई। इस हमले में अभिनेता बाल-बाल बच गए, लेकिन गोलियों से उनका ड्राइवर और पास ही खड़ा एक व्लॉगर घायल हो गया।
जांचकर्ताओं और पुलिस के खुलासे के अनुसार, टाइगर श्रॉफ पर हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार की डिलीवरी के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और मुंबई में फैला एक सुनियोजित हथियार तस्करी नेटवर्क काम कर रहा था:
अमृतसर में ‘डेड लेटर बॉक्स’ ड्रॉप: फायरिंग में इस्तेमाल की गई पिस्तौल और कारतूस पंजाब के अमृतसर में एक पूर्व-नियोजित गुप्त स्थान से हासिल किए गए थे। आपराधिक शब्दावली में ‘डेड लेटर बॉक्स’ (या डेड ड्रॉप) उस गुप्त जगह को कहते हैं जहाँ बिना आमने-सामने मिले कोई सामान छोड़ दिया जाता है ताकि दूसरा व्यक्ति उसे वहाँ से उठा सके। विदेशी हैंडलर और लॉबिस्ट लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे अनिल पंडित द्वारा एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए भेजे गए कोऑर्डिनेट्स के आधार पर, दो स्थानीय गुर्गों—कुणाल और सुमित—ने अमृतसर जाकर इस खेप को उठाया था।
सौदा: खबरों के मुताबिक, अनिल पंडित ने इस काम के लिए कुणाल और सुमित को 70,000 से 80,000 रुपये के बीच भुगतान किया था।
महिला कूरियर: सुरक्षा जाँच से बचने के लिए कुणाल ने सोनीपत की दो फैक्ट्री कामगारों—अपनी गर्लफ्रेंड राधा और उसकी साथी बबीता—को कूरियर के तौर पर इस्तेमाल किया। मिली हुई रकम में से दोनों ने उन महिलाओं को 10,000 से 12,000 रुपये दिए थे।
मुंबई के लिए सफर: 15 अक्टूबर को कुणाल ने राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छोड़ा। पिस्तौल को राधा के निजी बैग के अंदर छिपाया गया था। सफर के दौरान कुणाल एक एन्क्रिप्टेड चैट ऐप के जरिए लगातार उनके संपर्क में था।
हथियार हैंडओवर: 17 अक्टूबर को दोनों महिलाएँ मुंबई के दादर पहुँचीं और एक होटल में रुकीं। उसी दिन सुबह करीब 11:00 बजे, एक अज्ञात युवक ने होटल के पास राधा से हथियार वाला बैग लिया, जिसे आखिरकार उन शूटरों तक पहुँचाया गया जिन्होंने 18 अक्टूबर को इस हमले को अंजाम दिया।







