नई दिल्ली। मतदाता सूची में कथित तौर पर पाई गई गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन और रैलियां की जा रही हैं। इसी सिलसिले में कांग्रेस पार्टी ने आगामी 1 नवंबर को होने वाली महारैली के लिए अपनी तैयारियों को बेहद तेज कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी ने शनिवार को यह घोषणा की कि पार्टी पूरे देश में मार्च निकालेगी, घर-घर जाकर पर्चे बांटेगी और जागरूकता बैठकों का आयोजन करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिसंबर के अंत तक सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में अनिवार्य रूप से दर्ज हो जाएं।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश भर में बड़े पैमाने पर करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं और सूचियों में भारी अनियमित्ताएं बरती गई हैं, जिसके कारण आम नागरिक अपने मताधिकार से वंचित होने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बूथ स्तर पर विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे।
आगामी 1 नवंबर को ‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक विशाल महारैली का आयोजन किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी का यह मानना है कि इस महारैली के माध्यम से पूरे देश में यह कड़ा संदेश जाएगा कि विपक्ष पूरी तरह से एकजुट है और देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए वोट चोरों को सत्ता से बेदखल करके रहेगा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने इस रैली की निर्धारित तारीख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस बीच, कांग्रेस ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर रैली की तैयारियों की गहन समीक्षा की और इसे ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया। कांग्रेस पार्टी ने इस विरोध प्रदर्शन के लिए ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ का प्रमुख नारा तय किया है।
दूसरी ओर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को व्यापारियों द्वारा लिखे गए एक पत्र के मामले पर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। व्यापारियों ने चेतावनी दी थी कि दीपावली के व्यस्त समय में ऐसी बड़ी रैली आयोजित होने से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इसे पूरी तरह से भाजपा की एक सोची-समझी साजिश करार दिया और कहा कि भाजपा ऐसे हथकंडे अपनाती है तथा अपने ही लोगों से इस तरह के पत्र लिखवाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि व्यापारियों को ऐसी कोई वास्तविक चिंता थी, तो क्या स्थानीय पुलिस प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं थी और पुलिस ने इस कार्यक्रम की विधिवत अनुमति क्यों दी। अल्वी के अनुसार, यह पूरा कार्यक्रम सभी नियमों का पालन करते हुए अनुमति लेने के बाद ही तय किया गया था और उन्होंने दावा किया कि भाजपा देश भर से आने वाली भारी भीड़ को देखकर बुरी तरह डर चुकी है।
दूसरी तरफ, 1 नवंबर की तारीख चुने जाने को लेकर चंडीगढ़ में भाजपा सांसद सतनाम सिंह संधू ने बहुत कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस आज भी उतनी ही असंवेदनशील बनी हुई है जितनी वह 1984 में सिख नरसंहार के समय थी, क्योंकि 1 नवंबर का दिन सिख इतिहास का एक बेहद काला दिन है। संधू के अनुसार, उस dark period के दौरान दिल्ली में हजारों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया था, उनके घरों को लूटा गया था और परिवारों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने दशकों तक पीड़ित सिख परिवारों को न्याय से वंचित रखा। उनके मुताबिक, इस दिन सिख समुदाय के लोग अपने दिवंगत प्रियजनों को याद कर प्रार्थना करते हैं, और कांग्रेस ने जानबूझकर राजनीति चमकाने और शक्ति प्रदर्शन करने के लिए यही तारीख चुनी है ताकि सिखों की भावनाओं और उनकी आवाज को दबाया जा सके।








