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October 11, 2026 1:21 pm

शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, जानें कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय

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शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहा है। देशभर में माता दुर्गा के भक्त नौ दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इसी दिन घरों तथा मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे सुख-समृद्धि, शुभता और मां दुर्गा के स्वागत का प्रतीक माना जाता है।

नवरात्रि के दौरान भक्त व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं। कई घरों में अखंड ज्योति भी प्रज्वलित की जाती है। हालांकि, कलश स्थापना करने से पहले शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि 11 अक्टूबर को घटस्थापना का सबसे शुभ समय क्या है और कलश स्थापना कब तक की जा सकती है।

कलश स्थापना का क्या है महत्व?

हिंदू धर्म में कलश को शुभता, समृद्धि और मंगल कार्यों का प्रतीक माना गया है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने और मां दुर्गा का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाली देवी आराधना की शुरुआत होती है।

कैसे करें घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा?

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और वहां स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा की परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और उसके पास जल से भरा कलश रखा जाता है। कलश पर रोली या चंदन से तिलक लगाएं, उसके मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। इसके बाद गणेश जी और मां दुर्गा का स्मरण करते हुए पूजा का संकल्प लें।

मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और माता की आरती करें। पूजा के दौरान घर में स्वच्छता बनाए रखें और श्रद्धा के साथ मां दुर्गा का ध्यान करें। पूजा की सामग्री और विधि में स्थानीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।

शुभ मुहूर्त का रखें ध्यान

कलश स्थापना के मुहूर्त को लेकर अलग-अलग पंचांगों में स्थान और गणना के आधार पर अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग में 11 अक्टूबर 2026 के लिए दिए गए घटस्थापना मुहूर्त और उसकी समाप्ति का समय अवश्य जांच लें। केवल सामान्य समय के आधार पर मुहूर्त तय करने के बजाय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना को प्राथमिकता देना उचित है।

शारदीय नवरात्रि का यह पर्व भक्तों को भक्ति, संयम और सकारात्मकता का संदेश देता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। श्रद्धालु इन दिनों माता से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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